दुनिया Poetry (page 82)

अनार्किज़्म

असग़र मेहदी होश

मोहब्बत कर के शर्मिंदा नहीं हूँ

असग़र मेहदी होश

कोई महमिल-नशीं क्यूँ शाद या नाशाद होता है

असग़र गोंडवी

जान-ए-नशात हुस्न की दुनिया कहें जिसे

असग़र गोंडवी

तुम्हारी याद में दुनिया को हूँ भुलाए हुए

असर सहबाई

सारी दुनिया से बे-नियाज़ी है

असर सहबाई

तुम्हारी याद में दुनिया को हूँ भुलाए हुए

असर सहबाई

कोई हमदम बना के देखो तुम

असर अकबराबादी

असरार अगर समझे दुनिया की हर इक शय के

असद मुल्तानी

इन अक़्ल के बंदों में आशुफ़्ता-सरी क्यूँ है

असद मुल्तानी

ख़याल यार मुझे जब लहू रुलाने लगा

असद जाफ़री

लेता नहीं किसी का पस-ए-मर्ग कोई नाम

असअ'द बदायुनी

कोई हमदम नहीं दुनिया में लेकिन

असअ'द बदायुनी

गाँव की आँख से बस्ती की नज़र से देखा

असअ'द बदायुनी

जो लोग रातों को जागते थे

असअ'द बदायुनी

सुख़न-वरी का बहाना बनाता रहता हूँ

असअ'द बदायुनी

सैल-ए-गिर्या का सीने से रिश्ता बहुत

असअ'द बदायुनी

रास्ता कोई सफ़र कोई मसाफ़त कोई

असअ'द बदायुनी

पोशीदा क्यूँ है तूर पे जल्वा दिखा के देख

असअ'द बदायुनी

मौसम-ए-हिज्र तो दाइम है न रुख़्सत होगा

असअ'द बदायुनी

ख़ुशी भी अब सरापा ग़म लगे है

असअ'द बदायुनी

गाँव की आँख से बस्ती की नज़र से देखा

असअ'द बदायुनी

वो क्या लिखता जिसे इंकार करते भी हिजाब आया

आरज़ू लखनवी

वअ'दा सच्चा है कि झूटा मुझे मालूम न था

आरज़ू लखनवी

न कर तलाश-ए-असर तीर है लगा न लगा

आरज़ू लखनवी

मुझ को दिल क़िस्मत ने उस को हुस्न-ए-ग़ारत-गर दिया

आरज़ू लखनवी

मासूम नज़र का भोला-पन ललचा के लुभाना क्या जाने

आरज़ू लखनवी

जो बुत है यहाँ अपनी जा एक ही है

आरज़ू लखनवी

जिन रातों में नींद उड़ जाती है क्या क़हर की रातें होती हैं

आरज़ू लखनवी

दिल में याद-ए-बुत-ए-बे-पीर लिए बैठा हूँ

आरज़ू लखनवी

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