घर Poetry (page 115)

वो लम्हा मुझ को शश्दर कर गया था

अम्बर बहराईची

क्यूँ न हों शाद कि हम राहगुज़र में हैं अभी

अम्बर बहराईची

हर लम्हा सैराबी की अर्ज़ानी है

अम्बर बहराईची

दरवाज़ा वा कर के रोज़ निकलता था

अम्बर बहराईची

किसे ख़याल कि इशरत के बाब कितने हैं

अमर सिंह फ़िगार

जोश-ए-तकमील-ए-तमन्ना है ख़ुदा ख़ैर करे

अमर सिंह फ़िगार

बैठा है सोगवार सितमगर के शहर में

अमर सिंह फ़िगार

रूह को राह-ए-अदम में मिरा तन याद आया

अमानत लखनवी

लम्हात-ए-आज़ादी

अल्ताफ़ मशहदी

उस के जाते ही ये क्या हो गई घर की सूरत

अल्ताफ़ हुसैन हाली

नशात-ए-उमीद

अल्ताफ़ हुसैन हाली

मुनाजात-ए-बेवा

अल्ताफ़ हुसैन हाली

मिट्टी का दिया

अल्ताफ़ हुसैन हाली

मर्सिया-ए-देहली-ए-मरहूम

अल्ताफ़ हुसैन हाली

हुब्ब-ए-वतन

अल्ताफ़ हुसैन हाली

उस के जाते ही ये क्या हो गई घर की सूरत

अल्ताफ़ हुसैन हाली

ख़ूबियाँ अपने में गो बे-इंतिहा पाते हैं हम

अल्ताफ़ हुसैन हाली

कब्क ओ क़ुमरी में है झगड़ा कि चमन किस का है

अल्ताफ़ हुसैन हाली

जीते जी मौत के तुम मुँह में न जाना हरगिज़

अल्ताफ़ हुसैन हाली

इश्क़ को तर्क-ए-जुनूँ से क्या ग़रज़

अल्ताफ़ हुसैन हाली

है जुस्तुजू कि ख़ूब से है ख़ूब-तर कहाँ

अल्ताफ़ हुसैन हाली

गुलों की गर इनायत हो गई तो

आलोक यादव

मैं भी बिखरा हुआ हूँ अपनों में

आलोक मिश्रा

ज़रा भी काम न आएगा मुस्कुराना क्या

आलोक मिश्रा

जज़्ब कुछ तितलियों के पर में है

आलोक मिश्रा

जाने किस बात से दुखा है बहुत

आलोक मिश्रा

वर्किंग लेडी

अलमास शबी

वालिदा मरहूमा की याद में

अल्लामा इक़बाल

तराना-ए-मिल्ली

अल्लामा इक़बाल

नानक

अल्लामा इक़बाल

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