घर Poetry (page 113)

इक तरफ़ प्यार है रिश्ता है वफ़ादारी है

अमित शर्मा मीत

दुनिया को जब नज़दीकी से देखा है

अमित शर्मा मीत

अपने हिस्से की अना दूँ तो अना दूँ किस को

अमित शर्मा मीत

जगमगा उट्ठा है रंग मंच

अमित गुप्ता

एहसास

अमित गुप्ता

क्यूँ ख़राबात में लाफ़-ए-हमा-दानी वाइ'ज़

अमीरुल्लाह तस्लीम

भूले से भी न जानिब-ए-अग़्यार देखना

अमीरुल्लाह तस्लीम

मुझ को ख़ामोशी-ए-हालात से डर लगता है

आमिर रियाज़

हमारे चेहरों में पिन्हाँ हैं ज़ाविए क्या क्या

आमिर नज़र

तुम राह में चुप-चाप खड़े हो तो गए हो

अमीर क़ज़लबाश

मिरे घर में तो कोई भी नहीं है

अमीर क़ज़लबाश

ख़ाली हाथ निकल घर से

अमीर क़ज़लबाश

पाईं हर एक राह-गुज़र पर उदासियाँ

अमीर क़ज़लबाश

नज़र में हर दुश्वारी रख

अमीर क़ज़लबाश

नज़र आने से पहले डर रहा हूँ

अमीर क़ज़लबाश

नदी के पार उजाला दिखाई देता है

अमीर क़ज़लबाश

क्या ख़रीदोगे चार आने में

अमीर क़ज़लबाश

ख़ुद अपने साथ सफ़र में रहे तो अच्छा है

अमीर क़ज़लबाश

ख़ौफ़ बन कर ये ख़याल आता है अक्सर मुझ को

अमीर क़ज़लबाश

जंग जारी है ख़ानदानों में

अमीर क़ज़लबाश

हर रहगुज़र में काहकशाँ छोड़ जाऊँगा

अमीर क़ज़लबाश

हर गाम हादसा है ठहर जाइए जनाब

अमीर क़ज़लबाश

हर एक हाथ में पत्थर दिखाई देता है

अमीर क़ज़लबाश

दर्द का शहर कहीं कर्ब का सहरा होगा

अमीर क़ज़लबाश

दामन पे लहू हाथ में ख़ंजर न मिलेगा

अमीर क़ज़लबाश

बसर होना बहुत दुश्वार सा है

अमीर क़ज़लबाश

आँखें खुली हुई हैं तो मंज़र भी आएगा

अमीर क़ज़लबाश

आज की रात भी गुज़री है मिरी कल की तरह

अमीर क़ज़लबाश

मिसी छूटी हुई सूखे हुए होंट

अमीर मीनाई

किसी रईस की महफ़िल का ज़िक्र ही क्या है

अमीर मीनाई

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