हाल Poetry (page 15)

सच का लम्हा जब भी नाज़िल होता है

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

हमारे हाल-ए-ज़बूँ पर मलाल है कितना

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

दिल जहाँ भी डूबा है उन की याद आई है

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

हम क़ुव्वत-ए-जज़्ब-ए-दिल दिखाएँ

शहाबुद्दीन साक़िब

न क्यूँ कि अश्क-ए-मुसलसल हो रहनुमा दिल का

शाह नसीर

इक क़ाफ़िला है बिन तिरे हम-राह सफ़र में

शाह नसीर

दिल में है क्या जानिए किस का ख़याल-ए-नक़्श-ए-पा

शाह नसीर

अफ़्साना मिरे दिल का दिल-आज़ार से कह दो

शाह आसिम

मेहमाँ है कोई दम का ज़माना शबाब का

शाग़िल क़ादरी

अपने ख़ूँ का उन पे क्यूँ दा'वा किया

शाग़िल क़ादरी

तस्वीर-ए-इज़्तिराब सरापा बना हुआ

शफ़क़त काज़मी

हमारे हाल पे किस दिन जफ़ा नहीं करते

शफ़क़त काज़मी

इक पल भी मिरे हाल से ग़ाफ़िल नहीं ठहरा

शफ़ीक़ सलीमी

ज़िंदगी तुझ से हमें अब कोई शिकवा ही नहीं

शफ़ीक़ देहलवी

अगर वो हम-सफ़र ठहरें तो हम को डर में रखते हैं

शफ़ीक़ आसिफ़

गुल याद न अमवाज-ए-नसीम-ए-सहरी याद

शायर फतहपुरी

शगुफ़्ता होते ही मुरझा गई कली अफ़सोस

शाद लखनवी

गोश कर फ़रियाद-ए-आशिक़ जान कर

शाद लखनवी

जफ़ा-शिआ'र भी हो कोई मेहरबाँ भी रहे

शाद बिलगवी

जब किसी ने हाल पूछा रो दिया

शाद अज़ीमाबादी

तेरी ज़ुल्फ़ें ग़ैर अगर सुलझाएगा

शाद अज़ीमाबादी

ता-उम्र आश्ना न हुआ दिल गुनाह का

शाद अज़ीमाबादी

न दिल अपना न ग़म अपना न कोई ग़म-गुसार अपना

शाद अज़ीमाबादी

क्यूँ हो बहाना-जू न क़ज़ा सर से पाँव तक

शाद अज़ीमाबादी

कुछ कहे जाता था ग़र्क़ अपने ही अफ़्साने में था

शाद अज़ीमाबादी

जिए जाएँगे हम भी लब पे दम जब तक नहीं आता

शाद अज़ीमाबादी

ग़म-ए-फ़िराक़ मय ओ जाम का ख़याल आया

शाद अज़ीमाबादी

अब भी इक उम्र पे जीने का न अंदाज़ आया

शाद अज़ीमाबादी

तुम से रुख़्सत-तलब है मिल जाओ

शबनम शकील

न पूछ देख के कितना मलाल होता है

शबनम शकील

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