हाल Poetry (page 17)

बुलबुल ने जिसे जा के गुलिस्तान में देखा

मोहम्मद रफ़ी सौदा

अपने का है गुनाह बेगाने ने क्या किया

मोहम्मद रफ़ी सौदा

आदम का जिस्म जब कि अनासिर से मिल बना

मोहम्मद रफ़ी सौदा

इन्ना लिल्लाही ओ इन्ना इलैहि राजेऊन

सत्यपाल आनंद

कहाँ पे खोलोगे दर्द अपना किसे कहोगे

सरवत ज़ेहरा

सवाल-अंदर-सवाल ले कर कहाँ चले हो

सरवत ज़ेहरा

सवाब की दुआओं ने गुनाह कर दिया मुझे

सरवत ज़ेहरा

क्या तमाशा देखिए तहसील-ए-ला-हासिल में है

सरवर आलम राज़

महबूबा के लिए आख़िरी नज़्म

सरमद सहबाई

कितना दुश्वार है इक लम्हा भी अपना होना

सरफ़राज़ नवाज़

मुझ को होना है तो दरवेश के जैसा हो जाऊँ

सरफ़राज़ नवाज़

किसे ख़बर थी कि इस को भी टूट जाना था

सरफ़राज़ नवाज़

ऐसा नहीं कि उन से मोहब्बत नहीं मुझे

सरदार सोज़

वुसअ'त-ए-बहर-ए-इश्क़ क्या कहिए

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

आधा कमरा

सारा शगुफ़्ता

सुनने वाले रो दिए सुन कर मरीज़-ए-ग़म का हाल

साक़िब लखनवी

हिज्र की शब नाला-ए-दिल वो सदा देने लगे

साक़िब लखनवी

असीर-ए-इश्क़-ए-मरज़ हैं तो क्या दवा करते

साक़िब लखनवी

मैं वही दश्त हमेशा का तरसने वाला

साक़ी फ़ारुक़ी

कौन पुर्सान-ए-हाल है मेरा

साक़ी अमरोहवी

वो मेरे हाल-ए-दिल से इस क़दर भी बे-ख़बर होगा

संदीप कोल नादिम

कैसे हो क्या है हाल मत पूछो

सलमान अख़्तर

कैसे हो क्या है हाल मत पूछो

सलमान अख़्तर

हज़ारों रंज मिले सैंकड़ों मलाल मिले

सलीम शुजाअ अंसारी

जाने कैसे होंगे आँसू बहते हैं तो बहने दो

सलीम रज़ा रीवा

ये फ़ैसला भी मिरे दस्त-ए-बा-कमाल में था

सलीम शाहिद

रौशन सुकूत सब उसी शो'ला-बयाँ से है

सलीम शाहिद

मैं वो आँसू कि जो माला में पिरोया जाए

सलीम शाहिद

ऐ मिरे चारागर तिरे बस में नहीं मोआमला

सलीम कौसर

वहाँ महफ़िल न सजाई जहाँ ख़ल्वत नहीं की

सलीम कौसर

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