हाथ Poetry (page 53)

गुलों के चेहरा-ए-रंगीं पे वो निखार नहीं

फ़ैज़ी निज़ाम पुरी

जो दिल को पहले मयस्सर था क्या हुआ उस का

फ़ैज़ी

इस लिए दिल बुरा किया ही नहीं

फ़ैज़ी

बहुत सा काम तो पहले ही कर लिया मैं ने

फ़ैज़ान हाशमी

जो नफ़स था ख़ार-ए-गुलू बना जो उठे थे हाथ लहू हुए

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ज़िंदाँ की एक सुब्ह

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

यहाँ से शहर को देखो

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तुम्हारे हुस्न के नाम

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तुम ही कहो क्या करना है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

सुब्ह-ए-आज़ादी (अगस्त-47)

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

सियासी लीडर के नाम

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

शोर-ए-बरबत-ओ-नय

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

शीशों का मसीहा कोई नहीं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

शाएर लोग

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मोरी अर्ज सुनो

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मौज़ू-ए-सुख़न

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मदह

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

जश्न का दिन

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ईरानी तलबा के नाम

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

इंतिसाब

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

फ़लस्तीनी शोहदा जो परदेस में काम आए

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दुआ

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

वो बुतों ने डाले हैं वसवसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा गया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

शरह-ए-फ़िराक़ मदह-ए-लब-ए-मुश्कबू करें

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

सब क़त्ल हो के तेरे मुक़ाबिल से आए हैं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

कुछ पहले इन आँखों आगे क्या क्या न नज़ारा गुज़रे था

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

किस हर्फ़ पे तू ने गोश-ए-लब ऐ जान-ए-जहाँ ग़म्माज़ किया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हिम्मत-ए-इल्तिजा नहीं बाक़ी

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

अब वही हर्फ़-ए-जुनूँ सब की ज़बाँ ठहरी है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मिटा के तीरगी तनवीर चाहता है दिल

फ़ैय्याज़ रश्क़

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