हाथ Poetry (page 9)

मिरे नज़'अ को मत उस से कहो हुआ सो हुआ

वली उज़लत

ख़ुदा शाहिद बुतो दो-जग से ये सौदा है निर्वाला

वली उज़लत

ख़त ने आ कर की है शायद रहम फ़रमाने की अर्ज़

वली उज़लत

सोहबत-ए-ग़ैर मूं जाया न करो

वली मोहम्मद वली

देखना हर सुब्ह तुझ रुख़्सार का

वली मोहम्मद वली

नायाब है सुकून दिल-ए-बे-क़रार में

वाजिद अली शाह अख़्तर

गर्मियाँ शोख़ियाँ किस शान से हम देखते हैं

वाजिद अली शाह अख़्तर

दिखाते हैं जो ये सनम देखते हैं

वाजिद अली शाह अख़्तर

बरबाद न कर उस को ज़रा हाथ पे धर ला

वाजिद अली शाह अख़्तर

मिरे अंदर कहीं पर खो गई है

वजीह सानी

गिले शिकवे के दफ़्तर आ गए तुम

वजीह सानी

आप ही अपना मैं दुश्मन हो गया

वजद चुगताई

सीने में मिरे दाग़-ए-ग़म-ए-इश्क़-ए-नबी है

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

नालों से अगर मैं ने कभी काम लिया है

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

क्या है कि आज चलते हो कतरा के राह से

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

किसी सूरत से उस महफ़िल में जा कर

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

किस नाम-ए-मुबारक ने मज़ा मुँह को दिया है

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

आज़ाद उस से हैं कि बयाबाँ ही क्यूँ न हो

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

मिज़्गाँ पे आज यास के मोती बिखर गए

वहीदा नसीम

कोई न चाहने वाला था हुस्न-ए-रुस्वा का

वहीद क़ुरैशी

परोमीथियस

वहीद अख़्तर

पत्थरों का मुग़न्नी

वहीद अख़्तर

मावरा

वहीद अख़्तर

खंडर आसेब और फूल

वहीद अख़्तर

सफ़र ही बाद-ए-सफ़र है तो क्यूँ न घर जाऊँ

वहीद अख़्तर

रुख़्सत-ए-नुत्क़ ज़बानों को रिया क्या देगी

वहीद अख़्तर

शाफ़्फ़ाफ़ियाँ(2)

वहीद अहमद

पचासी साल नीचे गिर गए

वहीद अहमद

क्या कहें क्या लिखें

वहीद अहमद

हैं किस लिए उदास कोई पूछता नहीं

विश्वनाथ दर्द

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