हाथ Poetry (page 10)

सय्याद आ गए हैं सभी एक घात पर

विश्मा ख़ान विश्मा

करना है कार-ए-ख़ैर तो फिर सर न देखना

विश्मा ख़ान विश्मा

तिरी जब नींद का दफ़्तर खुला था

विशाल खुल्लर

वो एक हाथ बढ़ाएगा तुझ को पा लेगा

विपुल कुमार

वक़्त की ताक़ पे दोनों की सजाई हुई रात

विपुल कुमार

जल्द आएँ जिन्हें सीने से लगाना है मुझे

विपुल कुमार

दिलों पे दर्द का इम्कान भी ज़ियादा नहीं

विपुल कुमार

मंज़िलों से भी आगे निकलता हुआ

विकास शर्मा राज़

हाथ पर हाथ रख के क्यूँ बैठूँ

विकास शर्मा राज़

तिरे ग़ुरूर मिरे ज़ब्त का सवाल रहा

विजय शर्मा अर्श

एक तस्वीर जो तश्कील नहीं हो पाई

वसाफ़ बासित

दुआ

वर्षा गोरछिया

फैला न यूँ ख़ुलूस की चादर मिरे लिए

वली मदनी

दिल प्यार के रिश्तों से मुकर भी नहीं जाता

वली मदनी

कुछ तो मोहब्बतों की वफ़ाएँ निभाऊँ मैं

उषा भदोरिया

अँधेरी शब में चराग़-ए-रह-ए-वफ़ा देना

उषा भदोरिया

तअ'स्सुब की फ़ज़ा में ता'ना-ए-किरदार क्या देता

उनवान चिश्ती

रूठना चाहो तो अब हरगिज़ मनाने का नहीं

उम्मीद ख़्वाजा

बसंत और होली की बहार

उफ़ुक़ लखनवी

इक बहाना है तुझे याद किए जाने का

तुफ़ैल बिस्मिल

क़त्ल करना है नए ख़्वाब का सो डरता हूँ

त्रिपुरारि

हैरत-ज़दा मैं उन के मुक़ाबिल में रह गया

तिलोकचंद महरूम

लफ़्ज़ की क़ैद से रिहा हो जा

तौक़ीर तक़ी

कहीं शुऊर में सदियों का ख़ौफ़ ज़िंदा था

तौक़ीर तक़ी

पलकों को तेरी शर्म से झुकता हुआ मैं देखूँ

तौक़ीर अहमद

ठहरे पानी पे हाथ मारा था

तौक़ीर अब्बास

एक टहनी से बर्ग टूटा है

तौक़ीर अब्बास

थकन की तल्ख़ियों को अरमुग़ाँ अनमोल देती है

ताैफ़ीक़ साग़र

फ़क़ीरों का चलन यूँ जिस्म के अंदर महकता है

ताैफ़ीक़ साग़र

सदियों लहू से दिल की हिकायत लिखी गई

तसनीम फ़ारूक़ी

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