हुआ Poetry (page 23)

डर मौत का न ख़ौफ़ किसी देवता का था

वसीम मीनाई

कोई दस्तक कोई आहट न सदा है कोई

वसीम मलिक

हम-सफ़र तू ने परों को जो मिरे काटा है

वसीम मलिक

पत्थर नज़र थी वाइ'ज़-ए-ख़ाना-ख़राब की

वसीम ख़ैराबादी

मौत आई मुझे कूचे में तिरे जाने से

वसीम ख़ैराबादी

क्या हुआ उस ने जो आशिक़ से जफ़ाकारी की

वसीम ख़ैराबादी

दीवाने की जन्नत

वसीम बरेलवी

उसे समझने का कोई तो रास्ता निकले

वसीम बरेलवी

सभी का धूप से बचने को सर नहीं होता

वसीम बरेलवी

सब ने मिलाए हाथ यहाँ तीरगी के साथ

वसीम बरेलवी

मेरा किया था मैं टूटा कि बिखरा रहा

वसीम बरेलवी

कुछ इतना ख़ौफ़ का मारा हुआ भी प्यार न हो

वसीम बरेलवी

ख़ुशी का साथ मिला भी तो दिल पे बार रहा

वसीम बरेलवी

आते आते मिरा नाम सा रह गया

वसीम बरेलवी

तिरी नज़र में तिरे मा-सिवा नहीं होगा

वक़ार वासिक़ी

पेश वो हर पल है साहब

वक़ार सहर

लबों पे शिकवा-ए-अय्याम भी नहीं होता

वक़ार सहर

सिदरत-उल-वस्ल के साए का तलबगार हूँ मैं

वक़ार ख़ान

कभी सिसकी कभी आवाज़ा सफ़र जारी है

वक़ार ख़ान

ज़िंदगी इतनी बे-मज़ा क्यूँ है

वक़ार हिल्म सय्यद नगलवी

लगता है इन दिनों के है महशर-ब-कफ़ हवा

वक़ार हिल्म सय्यद नगलवी

मौसम को भी 'वक़ार' बदल जाना चाहिए

वक़ार फ़ातमी

बरसों बा'द मिला तो उस ने हम से पूछा कैसे हो

वक़ार फ़ातमी

वो निगाह मिल के निगाह से ब-अदा-ए-ख़ास झिझक गई

वक़ार बिजनोरी

उन की चश्म-ए-मस्त में पोशीदा इक मय-ख़ाना था

वक़ार बिजनोरी

माँ

वामिक़ जौनपुरी

देहली

वामिक़ जौनपुरी

अलिफ़ लैला

वामिक़ जौनपुरी

तक़्सीर क्या है हसरत-ए-दीदार ही तो है

वामिक़ जौनपुरी

साज़-ए-हस्ती में कुछ सदा ही नहीं

वामिक़ जौनपुरी

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