हुआ Poetry (page 21)

उन की रफ़्तार से दिल का अजब अहवाल हुआ

वज़ीर अली सबा लखनवी

महशर का हमें क्या ग़म इस्याँ किसे कहते हैं

वज़ीर अली सबा लखनवी

कोई सूरत से गर सफ़ा हो

वज़ीर अली सबा लखनवी

दिल-ए-पुर दाग़ बाग़ किस का है

वज़ीर अली सबा लखनवी

दिल है ग़िज़ा-ए-रंज जिगर है ग़िज़ा-ए-रंज

वज़ीर अली सबा लखनवी

दाग़-ए-जुनूँ दिमाग़-ए-परेशाँ में रह गया

वज़ीर अली सबा लखनवी

बुत-परस्ती से न तीनत मिरी ज़िन्हार फिरी

वज़ीर अली सबा लखनवी

बाग़-ए-आलम में है बे-रंग बयान-ए-वाइ'ज़

वज़ीर अली सबा लखनवी

बच कर कहाँ मैं उन की नज़र से निकल गया

वज़ीर अली सबा लखनवी

ऐ सबा जज़्ब पे जिस दम दिल-ए-नाशाद आया

वज़ीर अली सबा लखनवी

आया जो मौसम-ए-गुल तो ये हिसाब होगा

वज़ीर अली सबा लखनवी

आप अपनी बेवफ़ाई देखिए

वज़ीर अली सबा लखनवी

या रब तिरी रहमत का तलबगार है ये भी

वज़ीर आग़ा

करना पड़ेगा अपने ही साए में अब क़याम

वज़ीर आग़ा

दिए बुझे तो हवा को किया गया बदनाम

वज़ीर आग़ा

ऐसे बढ़े कि मंज़िलें रस्ते में बिछ गईं

वज़ीर आग़ा

आहिस्ता बात कर कि हवा तेज़ है बहुत

वज़ीर आग़ा

तुम जो आते हो

वज़ीर आग़ा

तुझे भी याद तो होगा

वज़ीर आग़ा

टीन का डिब्बा

वज़ीर आग़ा

थकन

वज़ीर आग़ा

तर्ग़ीब

वज़ीर आग़ा

पीपल

वज़ीर आग़ा

पेश-गोई

वज़ीर आग़ा

जब आँख खुली मेरी

वज़ीर आग़ा

हथेली

वज़ीर आग़ा

इक बे-अंत वजूद

वज़ीर आग़ा

दरमाँदा

वज़ीर आग़ा

भूरी मिट्टी की तह को हटाएँ

वज़ीर आग़ा

बंधन

वज़ीर आग़ा

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