हुआ Poetry (page 19)

सूरज के साथ साथ उभारे गए हैं हम

यज़दानी जालंधरी

जल्वा अफ़रोज़ है कअ'बे के उजालों की तरह

यज़दानी जालंधरी

पर्दा आँखों से हटाने में बहुत देर लगी

यासमीन हामिद

जिस सम्त की हवा है उसी सम्त चल पड़ें

यासमीन हमीद

हम ने किसी को अहद-ए-वफ़ा से रिहा किया

यासमीन हमीद

एक इक हर्फ़ समेटो मुझे तहरीर करो

यासमीन हमीद

इक बे-पनाह रात का तन्हा जवाब था

यासमीन हमीद

दरिया की रवानी वही दहशत भी वही है

यासमीन हमीद

अभी से अच्छा हुआ रात सो गई वर्ना

यासमीन हबीब

वक़्त बस रेंगता है उम्र के साथ

यासमीन हबीब

लम्स-ए-तिश्ना-लबी से गुज़री है

यासमीन हबीब

किसी कशिश के किसी सिलसिले का होना था

यासमीन हबीब

बंदे का पर्दा शान-ए-इलाही छुपी हुई

यासीन अली ख़ाँ मरकज़

याद-ए-ख़ुदा से आया न ईमाँ किसी तरह

यासीन अली ख़ाँ मरकज़

जो नज़र किया मैं सिफ़ात में हुआ मुझ पे कब ये अयाँ नहीं

यासीन अली ख़ाँ मरकज़

जहाँ बात वहदत की गहरी रहेगी

यासीन अली ख़ाँ मरकज़

अपना पता मुझे बता बहर-ए-ख़ुदा तू कौन है

यासीन अली ख़ाँ मरकज़

आप को भूल के मैं याद-ए-ख़ुदा करता हूँ

यासीन अली ख़ाँ मरकज़

वस्ल भी हिज्र था विसाल न था

यशब तमन्ना

कमाल-ए-शौक़-ए-सफ़र भी उधर ही जाता है

यशब तमन्ना

दर्द की लहर थी गुज़र भी गई

यशब तमन्ना

ऐसा भी नहीं दर्द ने वहशत नहीं की है

यशब तमन्ना

ज़ख़्म मेरे दिल पे इक ऐसा लगा

यासीन अफ़ज़ाल

पलकों पे रुका क़तरा-ए-मुज़्तर की तरह हूँ

यासीन अफ़ज़ाल

बारिश रुकी वबाओं का बादल भी छट गया

यासीन अफ़ज़ाल

सब्र ख़ुद उकता गया अच्छा हुआ

याक़ूब उस्मानी

रू-ब-रू बुत के दुआ की भूल हो जाए तो फिर

याक़ूब तसव्वुर

मुसाफ़िरों के ये वहम-ओ-गुमाँ में था ही नहीं

याक़ूब तसव्वुर

ख़ून की एक नदी और बहेगी शायद

याक़ूब राही

हवा-ए-सुब्ह-ए-नुमू दुश्मन-ए-चमन कैसे

याक़ूब राही

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