हुआ Poetry (page 18)

पल पल जीने की ख़्वाहिश में कर्ब-ए-शाम-ओ-सहर माँगा

ज़फ़र गोरखपुरी

कौन याद आया ये महकारें कहाँ से आ गईं

ज़फ़र गोरखपुरी

जब इतनी जाँ से मोहब्बत बढ़ा के रक्खी थी

ज़फ़र गोरखपुरी

इरादा हो अटल तो मोजज़ा ऐसा भी होता है

ज़फ़र गोरखपुरी

धूप है क्या और साया क्या है अब मालूम हुआ

ज़फ़र गोरखपुरी

चेहरा लाला-रंग हुआ है मौसम-ए-रंज-ओ-मलाल के बाद

ज़फ़र गोरखपुरी

शब के तारीक समुंदर से गुज़र आया हूँ

ज़फ़र गौरी

फ़स्ल-ए-गुल को ज़िद है ज़ख़्म दिल का हरा कैसे हो

ज़फ़र गौरी

सिरहाने बेबसी रोती रही है

ज़फ़र अंसारी ज़फ़र

मोहब्बत की बुलंदी से कभी उतरा नहीं जाता

ज़फ़र अंसारी ज़फ़र

जब भी माज़ी के नज़ारे को नज़र जाएगी

ज़फ़र अंसारी ज़फ़र

आ के जब ख़्वाब तुम्हारे ने कहा बिस्मिल्लाह

ज़फ़र अज्मी

तिरे फ़िराक़ में घुटनों चली है तन्हाई

ज़फ़र अहमद परवाज़

ख़बर

यूसुफ़ ज़फ़र

यारो हर ग़म ग़म-ए-याराँ है क़रीब आ जाओ

यूसुफ़ ज़फ़र

यारो हर ग़म ग़म-ए-याराँ है क़रीब आ जाओ

यूसुफ़ ज़फ़र

वो मेरी जान है दिल से कभी जुदा न हुआ

यूसुफ़ ज़फ़र

तामीर-ए-ज़िंदगी को नुमायाँ किया गया

यूसुफ़ ज़फ़र

जो हुरूफ़ लिख गया था मिरी आरज़ू का बचपन

यूसुफ़ ज़फ़र

ख़ुद-फ़रेबी

यूसुफ़ तक़ी

मिरे भी सुर्ख़-रू होने का इक मौक़ा निकल आता

यूसुफ़ तक़ी

जाने कितनी देर चलेगी साथ मिरे चमकीली धूप

यूसुफ़ तक़ी

हाल कुछ अब के जुदा है तिरे दीवानों का

यूसुफ़ तक़ी

ज़ख़्मों की मुनाजात में पिन्हाँ वो असर था

युसूफ़ जमाल

सर पर दुख का ताज सुहाना लगता है

युसूफ़ जमाल

आँख में ठहरा हुआ सपना बिखर भी जाएगा

यूसुफ़ हसन

कितनी हसीन लगती है चेहरों की ये किताब

यूसुफ़ आज़मी

रू-ब-रू हैं वो देखता क्या है

यूनुस ग़ाज़ी

आती है फ़ुग़ाँ लब पे मिरे क़ल्ब-ओ-जिगर से

योगेन्द्र बहल तिश्ना

तन्हाई में अक्सर यही महसूस हुआ है

यज़दानी जालंधरी

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