हुआ Poetry (page 20)

आप अपना निशाँ नहीं मा'लूम

याक़ूब अली आसी

नज़रों में कहाँ उस की वो पहला सा रहा मैं

याक़ूब आमिर

क्या हुआ हम से जो दुनिया बद-गुमाँ होने लगी

याक़ूब आमिर

चंद घंटे शोर ओ ग़ुल की ज़िंदगी चारों तरफ़

याक़ूब आमिर

अगरचे हाल ओ हवादिस की हुक्मरानी है

याक़ूब आमिर

आतिश-ए-ग़म में भभूका दीदा-ए-नमनाक था

याक़ूब आमिर

उम्र फ़रियाद में बर्बाद गई कुछ न हुआ

इनामुल्लाह ख़ाँ यक़ीन

चश्म-ए-तर पर गर नहीं करता हवा पर रहम कर

इनामुल्लाह ख़ाँ यक़ीन

यार कब दिल की जराहत पे नज़र करता है

इनामुल्लाह ख़ाँ यक़ीन

उम्र आख़िर है जुनूँ कर लूँ बहाराँ फिर कहाँ

इनामुल्लाह ख़ाँ यक़ीन

इस क़दर ग़र्क़ लहू में ये दिल-ए-ज़ार न था

इनामुल्लाह ख़ाँ यक़ीन

रंग बदला फिर हवा का मय-कशों के दिन फिरे

यगाना चंगेज़ी

जैसे दोज़ख़ की हवा खा के अभी आया हो

यगाना चंगेज़ी

इम्तियाज़-ए-सूरत-ओ-मअ'नी से बेगाना हुआ

यगाना चंगेज़ी

फ़र्दा को दूर ही से हमारा सलाम है

यगाना चंगेज़ी

दुनिया के साथ दीन की बेगार अल-अमाँ

यगाना चंगेज़ी

वाँ नक़ाब उट्ठी कि सुब्ह-ए-हश्र का मंज़र खुला

यगाना चंगेज़ी

साया अगर नसीब हो दीवार-ए-यार का

यगाना चंगेज़ी

क़िस्सा किताब-ए-उम्र का क्या मुख़्तसर हुआ

यगाना चंगेज़ी

जब हुस्न-ए-बे-मिसाल पर इतना ग़ुरूर था

यगाना चंगेज़ी

दुनिया का चलन तर्क किया भी नहीं जाता

यगाना चंगेज़ी

दिल लगाने की जगह आलम-ए-ईजाद नहीं

यगाना चंगेज़ी

दामन-ए-क़ातिल जो उड़ उड़ कर हवा देने लगे

यगाना चंगेज़ी

चलता नहीं फ़रेब किसी उज़्र-ख़्वाह का

यगाना चंगेज़ी

चले चलो जहाँ ले जाए वलवला दिल का

यगाना चंगेज़ी

आप से आप अयाँ शाहिद-ए-मअ'नी होगा

यगाना चंगेज़ी

आप में क्यूँकर रहे कोई ये सामाँ देख कर

यगाना चंगेज़ी

हैं वो सूफ़ी जो कभी नाला-ए-नाक़ूस सुना

वज़ीर अली सबा लखनवी

अहवाल-ए-मज़ाहिब से ये साबित हुआ हम को

वज़ीर अली सबा लखनवी

वाइ'ज़ के मैं ज़रूर डराने से डर गया

वज़ीर अली सबा लखनवी

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