हुआ Poetry (page 31)

याद और ग़म की रिवायात से निकला हुआ है

तौक़ीर तक़ी

सूरत-ए-इश्क़ बदलता नहीं तू भी मैं भी

तौक़ीर तक़ी

लफ़्ज़ की क़ैद से रिहा हो जा

तौक़ीर तक़ी

कोई तासीर तो है इस की नवा में ऐसी

तौक़ीर तक़ी

कहीं शुऊर में सदियों का ख़ौफ़ ज़िंदा था

तौक़ीर तक़ी

आ गई धूप मिरी छाँव के पीछे पीछे

तौक़ीर रज़ा

रुख़ से नक़ाब उन के जो हटती चली गई

तौक़ीर अहमद

पलकों को तेरी शर्म से झुकता हुआ मैं देखूँ

तौक़ीर अहमद

मेरी आँखों में आ के राख हुआ

तौक़ीर अब्बास

वो रौशनी जो शफ़क़ का लिबास छोड़ गई

तौक़ीर अब्बास

ठहरे पानी पे हाथ मारा था

तौक़ीर अब्बास

अपने मंज़र से जुदा था इक दिन

तौक़ीर अब्बास

पर्वाज़ का था शौक़ मुझे आसमान तक

ताैफ़ीक़ साग़र

इस बार हुआ कुन का असर और तरह का

तसनीम आबिदी

हमारी क़ुर्बतों में फ़ासला न रह जाए

तसनीम आबिदी

ज़मीं पर सर-निगूँ बैठा हुआ हूँ

तस्लीम इलाही ज़ुल्फ़ी

किसी दयार किसी दश्त में सबा ले चल

तस्लीम इलाही ज़ुल्फ़ी

ख़्वाब पहले ले गया फिर रत-जगा भी ले गया

तस्लीम इलाही ज़ुल्फ़ी

तू क्यूँ पास से उठ चला बैठे बैठे

मीर तस्कीन देहलवी

रहने वालों को तिरे कूचे के ये क्या हो गया

मीर तस्कीन देहलवी

गर मेरे बैठने से वो आज़ार खींचते

मीर तस्कीन देहलवी

बे-मेहर कहते हो उसे जो बेवफ़ा नहीं

मीर तस्कीन देहलवी

तेरी वफ़ा का हम को गुमाँ इस क़दर हुआ

तासीर सिद्दीक़ी

दिल को क़रार मिलता है अक्सर चुभन के बा'द

तासीर सिद्दीक़ी

ज़ेहन में हो कोई मंज़िल तो नज़र में ले जाऊँ

तसव्वुर ज़ैदी

क़ुर्बां-गाह-ए-अम्न

तसद्द्क़ हुसैन ख़ालिद

अश्क टपकें लाख होंटों की हँसी जाती नहीं

तरुणा मिश्रा

कोई रखता ही नहीं फिर भी रहा करता है

तरकश प्रदीप

करते हुए तवाफ़ ख़यालात-ए-यार मैं

तरकश प्रदीप

काम कुछ ऐसे कर गया हूँ मैं

तरकश प्रदीप

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