हुआ Poetry (page 32)

ज़ेहन पर बोझ रहा, दिल भी परेशान हुआ

तारिक़ क़मर

मिज़ाज अपना मिला ही नहीं ज़माने से

तारिक़ क़मर

एक मुद्दत से ये मंज़र नहीं बदला 'तारिक़'

तारिक़ क़मर

लहु लहु आँखें

तारिक़ क़मर

ख़िज़ाँ-नसीबों पे बैन करती हुई हवाएँ

तारिक़ क़मर

जौन-एलिया से आख़री मुलाक़ात

तारिक़ क़मर

हवा रुकी है तो रक़्स-ए-शरर भी ख़त्म हुआ

तारिक़ क़मर

ज़ेहन पर बोझ रहा, दिल भी परेशान हुआ

तारिक़ क़मर

ये रोज़-ओ-शब की मसाफ़त ये आना जाना मिरा

तारिक़ क़मर

वो मेरे ख़्वाब की ताबीर तो बताए मुझे

तारिक़ क़मर

उस ने इक बार भी पूछा नहीं कैसा हूँ मैं

तारिक़ क़मर

पाँव जब हो गए पत्थर तो सदा दी उस ने

तारिक़ क़मर

नज़र नज़र से मिला कर कलाम कर आया

तारिक़ क़मर

न तुम मिले थे तो दुनिया चराग़-पा भी न थी

तारिक़ क़मर

ख़ुश्क आँखों से कहाँ तय ये मसाफ़त होगी

तारिक़ क़मर

एक तस्वीर जलानी है अभी

तारिक़ क़मर

चश्म-ए-बीना! तिरे बाज़ार का मेआर हैं हम

तारिक़ क़मर

सारी तरतीब-ए-ज़मानी मिरी देखी हुई है

तारिक़ नईम

पोशीदा किसी ज़ात में पहले भी कहीं था

तारिक़ नईम

लहू को पालते फिरते हैं हम हिना की तरह

तारिक़ मसऊद

कुछ दूर तक तो इस की सदा ले गई मुझे

तारिक़ बट

मैं ने जब जब भी तिरा नाम लिखा काग़ज़ पर

तनवीर गौहर

बेटे को सज़ा दे के अजब हाल हुआ है

तनवीर सिप्रा

फ़िक्र की आँच में पिघले तो ये मालूम हुआ

तनवीर सामानी

सोच का ज़हर न अब शाम-ओ-सहर दे कोई

तनवीर सामानी

रोज़ तब्दील हुआ है मिरे दिल का मौसम

तनवीर सामानी

फेंकें भी ये लिबास बदन का उतार के

तनवीर सामानी

दश्त में जो भी है जैसा मिरा देखा हुआ है

तनवीर सामानी

अहबाब हो गए हैं बहुत मुझ से बद-गुमान

तनवीर सामानी

सुर्ख़ फंदे सुनहरी मालाएँ

तनवीर मोनिस

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