हुआ Poetry (page 33)

टूटी है ये कश्ती तो मिरे साथ सफ़र को

तनवीर अंजुम

इस ख़ूबी-ए-क़िस्मत पे मुझे नाज़ बहुत है

तनवीर अंजुम

सफ़र और क़ैद में अब की दफ़अ' क्या हुआ

तनवीर अंजुम

राएगाँ सुब्ह की चिता पर

तनवीर अंजुम

मैं अपनी नज़्में वापस लेने को तय्यार हूँ

तनवीर अंजुम

शहरों के सारे जंगल गुंजान हो गए हैं

तनवीर अंजुम

कभी बहुत है कभी ध्यान तेरा कुछ कम है

तनवीर अंजुम

इज़्हार-ए-जुनूँ बर-सर-ए-बाज़ार हुआ है

तनवीर अंजुम

वो रक़्स कहाँ और वो तब-ओ-ताब कहाँ है

तनवीर अहमद अल्वी

लम्हा-दर-लम्हा गुज़रता ही चला जाता है

तनवीर अहमद अल्वी

लम्हा-दर-लम्हा गुज़रता ही चला जाता है

तनवीर अहमद अल्वी

फ़िशार-ए-हुस्न से आग़ोश-ए-तंग महके है

तनवीर अहमद अल्वी

बज़्म-ए-जाँ फिर निगह-ए-तौबा-शिकन माँगे है

तनवीर अहमद अल्वी

बात कुछ यूँ है कि ये ख़ौफ़ का मंज़र तो नहीं

तन्हा तिम्मापुरी

मेरा आईना मिरी शक्ल दिखाता है मुझे

तालिब चकवाली

कोई इस फ़स्ल में दीवाना हुआ है शायद

तालिब अली खान ऐशी

इश्क़ क्यूँ रुस्वा हुआ अपना सर-ए-राहे गाहे

तल्हा रिज़वी बारक़

दर्द-ए-दिल को दास्ताँ-दर-दास्ताँ होने तो दो

तल्हा रिज़वी बारक़

हम हिज्र के रस्तों की हवा देख रहे हैं

तालीफ़ हैदर

बस एक शय मिरे अंदर तमाम होती हुई

तालीफ़ हैदर

बहुत मुश्किल था मुझ को राह का हमवार कर देना

तालीफ़ हैदर

भूली-बिसरी रात

तख़्त सिंह

हर अश्क तिरी याद का नक़्श-ए-कफ़-ए-पा है

तख़्त सिंह

एक एक क़तरा उस का शो'ला-फ़िशाँ सा है

तख़्त सिंह

ग़म-ए-मोहब्बत में दिल के दाग़ों से रू-कश-ए-लाला-ज़ार हूँ मैं

ताजवर नजीबाबादी

ज़ख़्म कब का था दर्द उठा है अब

ताजदार आदिल

तुम्हारी याद बढ़ी और दिल हुआ रौशन

ताजदार आदिल

दुनिया-भर में जितने मंज़र अच्छे हैं

ताजदार आदिल

ज़ख़्म कब का था दर्द उठा है अब

ताजदार आदिल

सावन-रुत और उड़ती पुर्वा तेरे नाम

ताजदार आदिल

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