हुआ Poetry (page 29)

क़ज़ा जो दे तो इलाही ज़रा बदल के मुझे

वारिस किरमानी

लाख नादाँ हैं मगर इतनी सज़ा भी न मिले

वारिस किरमानी

सीने के दाग़ उन को दिखाए न जा सके

वली मदनी

वही हादसों के क़िस्से वही मौत की कहानी

वफ़ा बराही

मुमकिन नहीं है अपने को रुस्वा वफ़ा करे

वफ़ा बराही

अक्सर तन्हाई से मिल कर रोए हैं

उषा भदोरिया

आइने से बात करना इतना आसाँ भी नहीं

उषा भदोरिया

काश उस बुत को भी हम वक़्फ़-ए-तमन्ना देखें

उरूज ज़ैदी बदायूनी

यास ओ उमीद

उरूज क़ादरी

निफ़ाक़

उरूज क़ादरी

मोहब्बत

उरूज जाफ़री

राह जो चलनी है उस में ख़ूबियाँ कोई नहीं

उर्मिलामाधव

वो ध्यान की राहों में जहाँ हम को मिलेगा

उर्फ़ी आफ़ाक़ी

ज़िंदाबाद ऐ दश्त के मंज़र ज़िंदाबाद

उनवान चिश्ती

हुस्न से आँख लड़ी हो जैसे

उनवान चिश्ती

नाज़ कर नाज़ कि ये नाज़ जुदा है सब से

उम्मीद फ़ाज़ली

मक़्तल-ए-जाँ से कि ज़िंदाँ से कि घर से निकले

उम्मीद फ़ाज़ली

हम हैं बस इतने ही साहिल-आश्ना

उम्मीद फ़ाज़ली

हाए इक शख़्स जिसे हम ने भुलाया भी नहीं

उम्मीद फ़ाज़ली

बदन का बोझ उठाना भी अब मुहाल हुआ

उमर फ़ारूक़

अक्सर हुआ है ये कि ख़ुद अपनी तलाश में

उमर अंसारी

लड़ जाते हैं सरों पे मचलती क़ज़ा से भी

उमर अंसारी

हो के उस कूचे से आई तो सितम ढा गई क्या

उमर अंसारी

हर इक का दर्द उसी आशुफ़्ता-सर में तन्हा था

उमर अंसारी

बाहर बाहर सन्नाटा है अंदर अंदर शोर बहुत

उमर अंसारी

मिरी भँवों के ऐन दरमियान बन गया

उमैर नजमी

इस महफ़िल में मैं भी क्या बेबाक हुआ

उमैर मंज़र

जब इंसान को अपना कुछ इदराक हुआ

उमैर मंज़र

इल्म ओ फ़न के राज़-ए-सर-बस्ता को वा करता हुआ

उमैर मंज़र

बसंत और होली की बहार

उफ़ुक़ लखनवी

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