हुआ Poetry (page 45)

मज्लिस-ए-ऐश गर्म हो या-रब

सिराज औरंगाबादी

मैं न जाना था कि तू यूँ बे-वफ़ा हो जाएगा

सिराज औरंगाबादी

महरम-ए-दिल हुआ वो सहरा वा

सिराज औरंगाबादी

ख़ूब बूझा हूँ मैं उस यार कूँ कुइ क्या जाने

सिराज औरंगाबादी

ख़बर-ए-तहय्युर-ए-इश्क़ सुन न जुनूँ रहा न परी रही

सिराज औरंगाबादी

कल सीं बे-कल है मिरा जी यार कूँ देखा न था

सिराज औरंगाबादी

कहाँ है गुल-बदन मोहन पियारा

सिराज औरंगाबादी

काफ़िर हुआ हूँ रिश्ता-ए-ज़ुन्नार की क़सम

सिराज औरंगाबादी

जो तुझे देख के मबहूत हुआ

सिराज औरंगाबादी

जिस दिन सीं मैं यार बूझता हूँ

सिराज औरंगाबादी

जब सें तुझ इश्क़ की गरमी का असर है मन में

सिराज औरंगाबादी

जानाँ पे जी निसार हुआ क्या बजा हुआ

सिराज औरंगाबादी

जान ओ दिल सीं मैं गिरफ़्तार हूँ किन का उन का

सिराज औरंगाबादी

इश्क़ में आ कि अक़्ल कूँ खोनाँ

सिराज औरंगाबादी

हम हैं मुश्ताक़-ए-जवाब और तुम हो उल्फ़त सीं बईद

सिराज औरंगाबादी

हमारी आँखों की पुतलियों में तिरा मुबारक मक़ाम हैगा

सिराज औरंगाबादी

हमारे पास जानाँ आन पहुँचा

सिराज औरंगाबादी

गुल-रुख़ों ने किए हैं सैर का ठाट

सिराज औरंगाबादी

दिन-ब-दिन अब लुत्फ़ तेरा हम पे कम होने लगा

सिराज औरंगाबादी

दिल में ख़यालात-ए-रंगीं गुज़रते हैं जिऊँ बॉस फूलों के रंगों में रहिए

सिराज औरंगाबादी

दिल में जब आ के इश्क़ ने तेरे महल किया

सिराज औरंगाबादी

देखा है जिस ने यार के रुख़्सार की तरफ़

सिराज औरंगाबादी

चराग़-ए-मह सीं रौशन-तर है हुस्न-ए-बे-मिसाल उस का

सिराज औरंगाबादी

भरा कमाल-ए-वफ़ा सें ख़याल का शीशा

सिराज औरंगाबादी

अव्वल सीं दिल मिरा जो गिरफ़्तार था सो है

सिराज औरंगाबादी

अमल सें मय-परस्तों के तुझे क्या काम ऐ वाइ'ज़

सिराज औरंगाबादी

अग़्यार छोड़ मुझ सें अगर यार होवेगा

सिराज औरंगाबादी

आया पिया शराब का प्याला पिया हुआ

सिराज औरंगाबादी

ख़ुद को बचाऊँ जिस्म सँभालूँ कि रूह को

सिरज़ अालम ज़ख़मी

बहुत उदास है दिल जाने माजरा क्या है

सिरज़ अालम ज़ख़मी

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