प्रेम Poetry (page 28)

शमीम-ए-ज़ुल्फ़-ए-मुअम्बर जो रू-ए-यार से लूँ

शाह नसीर

शब जो रुख़-ए-पुर-ख़ाल से वो बुर्के को उतारे सोते हैं

शाह नसीर

सरज़मीन-ए-ज़ुल्फ़ में क्या दिल ठिकाने लग गया

शाह नसीर

पामाल-ए-राह-ए-इश्क़ हैं ख़िल्क़त की खा ठोकर भी हम

शाह नसीर

न क्यूँ कि अश्क-ए-मुसलसल हो रहनुमा दिल का

शाह नसीर

न दिखाइयो हिज्र का दर्द-ओ-अलम तुझे देता हूँ चर्ख़-ए-ख़ुदा की क़सम

शाह नसीर

मैं ज़ोफ़ से जूँ नक़्श-ए-क़दम उठ नहीं सकता

शाह नसीर

लिया न हाथ से जिस ने सलाम आशिक़ का

शाह नसीर

क्यूँ न कहें बशर को हम आतिश-ओ-आब ओ ख़ाक-ओ-बाद

शाह नसीर

कुछ सरगुज़िश्त कह न सके रू-ब-रू क़लम

शाह नसीर

ख़ुदा के वास्ते चेहरे से टुक नक़ाब उठा

शाह नसीर

ख़ाल-ए-रुख़ उस ने दिखाया न दोबारा अपना

शाह नसीर

कभू न उस रुख़-ए-रौशन पे छाइयाँ देखीं

शाह नसीर

जूँ ज़र्रा नहीं एक जगह ख़ाक-नशीं हम

शाह नसीर

जुदा नहीं है हर इक मौज देख आब के बीच

शाह नसीर

जो गुज़रे है बर आशिक़-ए-कामिल नहीं मालूम

शाह नसीर

जो ऐन वस्ल में आराम से नहीं वाक़िफ़

शाह नसीर

जिगर का जूँ शम्अ काश या-रब हो दाग़ रौशन मुराद हासिल

शाह नसीर

इस दिल को हम-कनार किया हम ने क्या किया

शाह नसीर

दिल में है क्या जानिए किस का ख़याल-ए-नक़्श-ए-पा

शाह नसीर

दिल जल्वा-गाह-ए-सूरत-ए-जानाना हो गया

शाह नसीर

दिल इश्क़-ए-ख़ुश-क़दाँ में जो ख़्वाहान-ए-नाला था

शाह नसीर

देख तू यार-ए-बादा-कश! मैं ने भी काम क्या किया

शाह नसीर

बे-मेहर-ओ-वफ़ा है वो दिल-आराम हमारा

शाह नसीर

काफ़िर-ए-इश्क़ हुआ जब से मैं इस दहर में हूँ

शाह आसिम

देख कर मुझ को तुझे क्यूँ है तहय्युर नासेह

शाह आसिम

उट्ठी है जब से दिल में मिरे इश्क़ की तरंग

शाह आसिम

सुब्हा से है न काम न ज़ुन्नार से ग़रज़

शाह आसिम

क़ैद-ए-दिल से है मिरी काकुल-ए-पेचाँ नाज़ाँ

शाह आसिम

मुझे साक़ी-ए-चश्म-ए-यार ने अजब एक जाम पिला दिया

शाह आसिम

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