प्रेम Poetry (page 27)

ब-नाम-ए-इश्क़ इक एहसान सा अभी तक है

शहराम सर्मदी

इश्क़ को अपने लिए समझा असासा दिल का

शहनाज़ मुज़म्मिल

सलीक़ा इश्क़ में मेरा बड़े कमाल का था

शाहिदा हसन

चाँद के साथ जल उठी मैं भी

शाहिदा हसन

चाँद के साथ जल उठी मैं भी

शाहिदा हसन

जिधर भी देखिए इक रास्ता बना हुआ है

शाहिद ज़की

ग़म की तहज़ीब अज़िय्यत का क़रीना सीखें

शाहिद माहुली

ग़म की तहज़ीब अज़िय्यत का क़रीना सीखें

शाहिद माहुली

ये जो रब्त रू-ब-ज़वाल है ये सवाल है

शाहिद लतीफ़

जो इस चमन में ये गुल सर्व-ओ-यासमन के हैं

शाहिद कमाल

हर्फ़-ए-कुन शह-ए-रग-ए-हू में गुम है

शाहिद कमाल

भर गए ज़ख़्म तो क्या दर्द तो अब भी कोई है

शाहिद कमाल

वो हर्फ़-ए-शौक़ हूँ जिस का कोई सियाक़ न हो

शाहिद इश्क़ी

लगता है जिस का रुख़-ए-ज़ेबा मह-ए-कामिल मुझे

शाहिद ग़ाज़ी

जुनून-ए-शौक़ की राहों में जब अपने क़दम निकले

शाहिद भोपाली

कुछ भी न जब दिखाई दे तब देखता हूँ मैं

शाहीन अब्बास

अब ऐसे चाक पर कूज़ा-गरी होती नहीं थी

शाहीन अब्बास

गरमी-ए-पहलू-ए-दिलदार ने सोने न दिया

शहबाज़ नदीम ज़ियाई

रुत्बा-ए-दर्द को जब अपना हुनर पहुँचेगा

शहाब जाफ़री

हिज्र-ओ-विसाल-ए-यार का मौसम निकल गया

शहाब जाफ़री

इश्क़ में तेरे कोह-ए-ग़म सर पे लिया जो हो सो हो

शाह नियाज़ अहमद नियाज़

सब पे रौशन है कि राह-ए-इश्क़ में मानिंद-ए-शम्अ

शाह नसीर

रख क़दम होश्यार हो कर इश्क़ की मंज़िल में आह

शाह नसीर

न क्यूँ कि अश्क-ए-मुसलसल हो रहनुमा दिल का

शाह नसीर

मेरे नाले के न क्यूँ हो चर्ख़-ए-अख़्ज़र ज़ेर-ए-पा

शाह नसीर

जूँ मौज हाथ मारिए क्या बहर-ए-इश्क़ में

शाह नसीर

ग़ुरूर-ए-हुस्न न कर जज़्बा-ए-ज़ुलेख़ा देख

शाह नसीर

ज़ुल्फ़ छुटती तिरे रुख़ पर तो दिल अपना फिरता

शाह नसीर

उस काकुल-ए-पुर-ख़म का ख़लल जाए तो अच्छा

शाह नसीर

उधर अब्र ले चश्म-ए-नम को चला

शाह नसीर

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