प्रेम Poetry (page 91)

फ़िक्र है शौक़-ए-कमर इश्क़-ए-दहाँ पैदा करूँ

अमीरुल्लाह तस्लीम

वस्ल की शब भी अदा-ए-रस्म-ए-हिरमाँ में रहा

अमीरुल्लाह तस्लीम

थक गए तुम हसरत-ए-ज़ौक़-ए-शहादत कम नहीं

अमीरुल्लाह तस्लीम

ग़ैब से सहरा-नवरदों का मुदावा हो गया

अमीरुल्लाह तस्लीम

फ़िक्र है शौक़-ए-कमर इश्क़-ए-दहाँ पैदा करूँ

अमीरुल्लाह तस्लीम

हमें आख़िरत में 'आमिर' वही उम्र काम आई

आमिर उस्मानी

ख़्वाब जो बिखर गए

आमिर उस्मानी

थी सियाहियों का मस्कन मिरी ज़िंदगी की वादी

आमिर उस्मानी

तह कर चुके बिसात-ए-ग़म-ओ-फ़िक्र-ए-रोज़गार

अमीर हम्ज़ा साक़िब

मीरास-ए-बे-बहा भी बचाई न जा सकी

अमीर हम्ज़ा साक़िब

दश्त-ए-बला-ए-शौक़ में ख़ेमे लगाए हैं

अमीर हम्ज़ा साक़िब

न हों ख़्वाहिशें न गिला कोई न जफ़ा कोई

अमीता परसुराम 'मीता'

ज़िंदगी अपना सफ़र तय तो करेगी लेकिन

अमीता परसुराम 'मीता'

न तो ख़ौफ़ रोज़-ए-जज़ा का हो वही इश्क़ है

अमीता परसुराम 'मीता'

कम्बख़्त दिल ने इश्क़ को वहशत बना दिया

अमीता परसुराम 'मीता'

बन गए दिल के फ़साने क्या क्या

अमीता परसुराम 'मीता'

आहों से सोज़-ए-इश्क़ मिटाया न जाएगा

अमीर मीनाई

तिरा क्या काम अब दिल में ग़म-ए-जानाना आता है

अमीर मीनाई

साफ़ कहते हो मगर कुछ नहीं खुलता कहना

अमीर मीनाई

पूछा न जाएगा जो वतन से निकल गया

अमीर मीनाई

हँस के फ़रमाते हैं वो देख के हालत मेरी

अमीर मीनाई

हैं न ज़िंदों में न मुर्दों में कमर के आशिक़

अमीर मीनाई

अमीर लाख इधर से उधर ज़माना हुआ

अमीर मीनाई

ऐ ज़ब्त देख इश्क़ की उन को ख़बर न हो

अमीर मीनाई

इस बार राह-ए-इश्क़ कुछ इतनी तवील थी

अमीर इमाम

ये कार-ए-ज़िंदगी था तो करना पड़ा मुझे

अमीर इमाम

वो मारका कि आज भी सर हो नहीं सका

अमीर इमाम

अब इस जहान-ए-बरहना का इस्तिआरा हुआ

अमीर इमाम

शाइ'र की दुनिया

अमीर औरंगाबादी

ख़त का इंतिज़ार

अमीर औरंगाबादी

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