जान Poetry (page 52)

शम्-ए-इख़्लास-ओ-यक़ीं दिल में जला कर चलिए

अशोक साहनी

सोचते हैं कि बुलबुला हो जाएँ

अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन

ये रोग लगा है अजब हमें जो जान भी ले कर टला नहीं

अशफ़ाक़ आमिर

इक पल में क्या कुछ बदल गया जब बे-ख़बरों को ख़बर हुई

अशफ़ाक़ आमिर

क्या क़द्र-ए-अना होगी जबीं जान रही है

अशहर हाशमी

अपनी रात लय जाओ

असग़र नदीम सय्यद

बस्ती मिली मकान मिले बाम-ओ-दर मिले

असग़र मेहदी होश

यूँ मुस्कुराए जान सी कलियों में पड़ गई

असग़र गोंडवी

शिकवा न चाहिए कि तक़ाज़ा न चाहिए

असग़र गोंडवी

रक़्स-ए-मस्ती देखते जोश-ए-तमन्ना देखते

असग़र गोंडवी

मय-ए-बे-रंग का सौ रंग से रुस्वा होना

असग़र गोंडवी

जान-ए-नशात हुस्न की दुनिया कहें जिसे

असग़र गोंडवी

इक आलम-ए-हैरत है फ़ना है न बक़ा है

असग़र गोंडवी

आलाम-ए-रोज़गार को आसाँ बना दिया

असग़र गोंडवी

जाने लगे हैं अब दम-ए-सर्द आसमाँ तलक

असीर लखनवी

नवेद-ए-वस्ल-ए-यार आए न आए

असर लखनवी

न शरह-ए-शौक़ न तस्कीन जान-ए-ज़ार में है

असर लखनवी

किस तरह खिलते हैं नग़्मों के चमन समझा था मैं

असर लखनवी

हिजाब-ए-रंग-ओ-बू है और मैं हूँ

असर लखनवी

दिल गया बे-क़रारियाँ न गईं

असर लखनवी

न साथी है न मंज़िल का पता है

असद भोपाली

जब ज़िंदगी सुकून से महरूम हो गई

असद भोपाली

मुझे भी वहशत-ए-सहरा पुकार मैं भी हूँ

असअ'द बदायुनी

यूँ दूर दूर दिल से हो हो के दिल-नशीं भी

आरज़ू लखनवी

कहीं सर पटकते दीवाने कहीं पर झुलसते परवाने

आरज़ू लखनवी

गँवा के दिल सा गुहर दर्द-ए-सर ख़रीद लिया

आरज़ू लखनवी

दिल मुकद्दर है आईना-रू का

आरज़ू लखनवी

इक लफ़्ज़ आ गया था जो मेरी ज़बान पर

अरशद कमाल

नित-नए नक़्श से बातिन को सजाता हुआ मैं

अरशद जमाल 'सारिम'

कोताह उम्र हो गई और ये न कम हुई

अरशद अली ख़ान क़लक़

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