चलो चलें Poetry (page 54)

वो मेरे नाले का शोर ही था शब-ए-सियह की निहायतों में

अतीक़ुल्लाह

तू भी तो एक लफ़्ज़ है इक दिन मिरे बयाँ में आ

अतीक़ुल्लाह

मैं छुपा रहूँगा निगाह-ओ-ज़ख़्म की ओट में

अतीक़ुल्लाह

कुछ और दिन अभी उस जा क़याम करना था

अतीक़ुल्लाह

कुछ और दिन अभी इस जा क़याम करना था

अतीक़ुल्लाह

कौन गुज़रा था मेहराब-ए-जाँ से अभी ख़ामुशी शोर भरता हुआ

अतीक़ुल्लाह

चराग़ हाथों के बुझ रहे हैं सितारा हर रह-गुज़र में रख दे

अतीक़ुल्लाह

वो बात जिस से ये डर था खुली तो जाँ लेगी

आतिफ़ ख़ान

मैं इंसान-ए-नौअ' हूँ मैं ईसा-नफ़स हूँ

आतिफ़ ख़ान

जो तकब्बुर से भटकती है ज़बाँ

आतिफ़ ख़ान

दे के ख़ुद ख़ून का मंज़र मुझ को

आतिफ़ ख़ान

ख़ुद को किसी की राह-गुज़र किस लिए करें

अतहर नासिक

ख़ुद को किसी की राहगुज़र किस लिए करें

अतहर नासिक

रौनक़-ए-बेश-ओ-कम किस के होने से है

अतहर नफ़ीस

न शाम है न सवेरा अजब दयार में हूँ

अतहर नफ़ीस

मिस्ल-ए-बाद-ए-सबा तेरे कूचे में ऐ जान-ए-जाँ आए हैं

अतहर नफ़ीस

दिल की मसर्रतें नई जाँ का मलाल है नया

अतहर नफ़ीस

'अतहर' तुम ने इश्क़ किया कुछ तुम भी कहो क्या हाल हुआ

अतहर नफ़ीस

अन-गिनत अज़ाब हैं रतजगों के दरमियाँ

अतीक़ुर्रहमान सफ़ी

वो सुकून-ए-जिस्म-ओ-जाँ गिर्दाब-ए-जाँ होने को है

अताउल हक़ क़ासमी

वो एक शख़्स कि मंज़िल भी रास्ता भी है

अताउल हक़ क़ासमी

वह एक शख़्स कि मंज़िल भी रास्ता भी है

अताउल हक़ क़ासमी

मंज़िलें भी ये शिकस्ता-बाल-ओ पर भी देखना

अताउल हक़ क़ासमी

यक लम्हा सही उम्र का अरमान ही रह जाए

अता शाद

चोब-ए-सहरा भी वहाँ रश्क-ए-समर कहलाए

अता शाद

चोब-ए-सहरा भी वहाँ रश्क-ए-समर कहलाए

अता शाद

किसी के जिस्म-ओ-जाँ छलनी किसी के बाल-ओ-पर टूटे

अता आबिदी

सानेहा

असरार-उल-हक़ मजाज़

रात और रेल

असरार-उल-हक़ मजाज़

किस से मोहब्बत है

असरार-उल-हक़ मजाज़

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