चलो चलें Poetry (page 59)

देखा जो मर्ग तो मरना ज़ियाँ न था

अनवर देहलवी

अश्क बेताब व निगह बे-बाक व चश्म-ए-तर ख़राब

अनवर देहलवी

आँखें दिखाईं ग़ैर को मेरी ख़ता के साथ

अनवर देहलवी

हमें भूला नहीं अफ़्साना दिल का

अनवर मोअज़्ज़म

आओ देखें अहल-ए-वफ़ा की होती है तौक़ीर कहाँ

अनवर मोअज़्ज़म

इतना सन्नाटा है कुछ बोलते डर लगता है

अनवर महमूद खालिद

शहर-दर-शहर फ़ज़ाओं में धुआँ है अब के

अनवर महमूद खालिद

है जो तासीर सी फ़ुग़ाँ में अभी

अंजुम रूमानी

ये कैसी बात मिरा मेहरबान भूल गया

अंजुम ख़लीक़

सदाक़तों को ये ज़िद है ज़बाँ तलाश करूँ

अंजुम ख़लीक़

मिरे जुनूँ को हवस में शुमार कर लेगा

अंजुम ख़लीक़

यक-ब-यक जाँ से गुज़रना तो है आसाँ 'अंजुम'

अंजुम इरफ़ानी

ये रात ढलते ढलते रख गई जवाब के लिए

अंजुम इरफ़ानी

तेशा-ब-कफ़ को आइना-गर कह दिया गया

अंजुम इरफ़ानी

लहजे का रस हँसी की धनक छोड़ कर गया

अंजुम इरफ़ानी

धूप आती नहीं रुख़ अपना बदल कर देखें

अंजुम इरफ़ानी

अब इस सादा कहानी को नया इक मोड़ देना था

अंजुम इरफ़ानी

ना-उमीदी कुफ़्र है

अंजुम आज़मी

मेरी दुनिया में अभी रक़्स-ए-शरर होता है

अंजुम आज़मी

जो शब भर आँसुओं से तर रहेगा

अंजुम आज़मी

अनजाने ख़्वाब की ख़ातिर क्यूँ चैन गँवाया

अंजुम अंसारी

हर एक पल मुझे दुख दर्द बे-शुमार मिले

अनीस अब्र

इसी ज़मीं पे इसी आसमाँ में रहना है

अनीस अशफ़ाक़

हमेशा किसी इम्तिहाँ में रहा

अनीस अशफ़ाक़

बड़ा आज़ार-ए-जाँ है वो अगरचे मेहरबाँ है वो

अनीस अंसारी

इस शहर के लोग अजीब से हैं अब सब ही तुम्हारे असीर हुए

अनीस अंसारी

बड़ा आज़ार-ए-जाँ है वो अगरचे मेहरबाँ है वो

अनीस अंसारी

चलो ये सच ही सही होगा ना-गहाँ गुज़रे

अनीस अहमद अनीस

मोहिब्बान-ए-वतन का नारा

आनंद नारायण मुल्ला

अरमाँ को छुपाने से मुसीबत में है जाँ और

आनंद नारायण मुल्ला

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