भगवान Poetry (page 23)

गर तुझ में है वफ़ा तो जफ़ाकार कौन है

मोहम्मद रफ़ी सौदा

गर कीजिए इंसाफ़ तो की ज़ोर वफ़ा मैं

मोहम्मद रफ़ी सौदा

दिल में तिरे जो कोई घर कर गया

मोहम्मद रफ़ी सौदा

बे-वज्ह नईं है आइना हर बार देखना

मोहम्मद रफ़ी सौदा

कहाँ कहाँ से निगह उस को ढूँड लाए है

सत्य नन्द जावा

जो दूर से हमें अक्सर ख़ुदा सा लगता है

सत्य नन्द जावा

देख लो रंग गर मिरे तिल के

सरवत मुख़तार

कम-अयारी ने ख़ुदा-सोज़ बनाया ऐसा

सरवर आलम राज़

आशिक़ी की ख़ैर हो 'सरवर' कि अब इस शहर में

सरवर आलम राज़

वक़्त के हाथों हिकायात-ए-अना भूल गए

सरवर आलम राज़

जिस क़दर शिकवे थे सब हर्फ़-ए-दुआ होने लगे

सरवर आलम राज़

लगा मजनूँ को ज़हर-ए-इश्क़ क्या आब-ए-बक़ा हो कर

सरताज आलम आबिदी

मिल-जुल कर ईमान ख़ुदा पर ला सकते हैं

सरफ़राज़ ज़ाहिद

मुझ को होना है तो दरवेश के जैसा हो जाऊँ

सरफ़राज़ नवाज़

बला से नाम वो मेरा उछाल देता है

सरफ़राज़ नवाज़

इब्तिदा उस ने ही की थी मिरी रुस्वाई की

सरफ़राज़ ख़ालिद

तश्कील बदर की है कभी है हिलाल की

सरीर काबिरी

हर इक दिल यहाँ है मोहब्बत से आरी

सरदार सोज़

ऐ शैख़ ये जो मानें का'बा ख़ुदा का घर है

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

वुसअ'त-ए-बहर-ए-इश्क़ क्या कहिए

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

उन बुतों से रब्त तोड़ा चाहिए

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

ब-जुज़ साया तन-ए-लाग़र को मेरे कोई क्या समझे

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

ख़ाली आँखों का मकान

सारा शगुफ़्ता

ऐ मेरे सर-सब्ज़ ख़ुदा

सारा शगुफ़्ता

यूँ अकेला दश्त-ए-ग़ुर्बत में दिल-ए-नाकाम था

साक़िब लखनवी

असीर-ए-इश्क़-ए-मरज़ हैं तो क्या दवा करते

साक़िब लखनवी

वो ख़ुदा है तो मिरी रूह में इक़रार करे

साक़ी फ़ारुक़ी

मिरा अकेला ख़ुदा याद आ रहा है मुझे

साक़ी फ़ारुक़ी

मैं तो ख़ुदा के साथ वफ़ादार भी रहा

साक़ी फ़ारुक़ी

मुहासबा

साक़ी फ़ारुक़ी

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