भगवान Poetry (page 27)

कलियों की महक होता तारों की ज़िया होता

साग़र सिद्दीक़ी

है दुआ याद मगर हर्फ़-ए-दुआ याद नहीं

साग़र सिद्दीक़ी

भूली हुई सदा हूँ मुझे याद कीजिए

साग़र सिद्दीक़ी

आओ इक सज्दा करूँ आलम-ए-बद-सम्ती में

साग़र निज़ामी

न कश्ती है न फ़िक्र-ए-ना-ख़ुदा है

साग़र निज़ामी

हैरत से तक रहा है जहान-ए-वफ़ा मुझे

साग़र निज़ामी

दश्त में क़ैस नहीं कोह पे फ़रहाद नहीं

साग़र निज़ामी

होली

साग़र ख़य्यामी

दुम

साग़र ख़य्यामी

रहेगा प्यासों से पानी का फ़ासला कब तक

साग़र ख़य्यामी

क्यूँ दिल तिरे ख़याल का हामिल नहीं रहा

साग़र ख़य्यामी

बैठे हैं ऐसे ज़ुल्फ़ में कलियाँ सँवार के

साग़र ख़य्यामी

पैग़ाम ज़िंदगी ने दिया मौत का मुझे

सफ़ी लखनवी

डूबते जाते थे तारे बादबाँ रौशन हुआ

सईदुल ज़फर चुग़ताई

वो अंजुमन में रात अजब शान से गए

सईद राही

नहीं है ये तिरा कूचा नहीं है

सईद राही

अपनी तलाश में निकले

सईद नक़वी

इब्तिदा मुझ में इंतिहा मुझ में

सईद नक़वी

पहले वो क़ैद-ए-मर्ग से मुझ को रिहा करे

सईद अख़्तर

सुलग रहा है चमन में बहार का मौसम

सईद अहमद अख़्तर

ये हादसा भी तो कुछ कम न था सबा के लिए

सईद अहमद अख़्तर

हैरत-ए-पैहम हुए ख़्वाब से मेहमाँ तिरे

सईद अहमद

दुरून-ए-चश्म हर इक ख़्वाब मर रहा है बस

सादिया सफ़दर सादी

अज़मत-ए-फ़िक्र के अंदाज़ अयाँ भी होंगे

सादिक़ नसीम

मंज़र-ए-रुख़्सत-ए-दिलदार भुलाया न गया

सदा अम्बालवी

दिखाएगी असर दिल की पुकार आहिस्ता आहिस्ता

सदा अम्बालवी

'ज़फ़र' वहाँ कि जहाँ हो कोई भी हद क़ाएम

साबिर ज़फ़र

पहले भी ख़ुदा को मानता था

साबिर ज़फ़र

ये सोच के राख हो गया हूँ

साबिर ज़फ़र

में सोचता हूँ जिसे आश्ना भी होता है

साबिर ज़फ़र

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