लोग Poetry (page 51)

बनाई है तिरी तस्वीर मैं ने डरते हुए

आसिम वास्ती

क्या ज़रूरी है शाएरी की जाए

अासिफ़ा निशात

जमाल-ए-यार को तस्वीर करने वाले थे

अासिफ़ शफ़ी

एक यूसुफ़ के ख़रीदार हुए हैं हम लोग

अासिफ़ शफ़ी

बज़्म-ए-सुख़न को आप की दिल-गीर चल पड़े

अासिफ़ साक़िब

दूर की शहज़ादी

आसिफ़ रज़ा

जिन लग़्ज़िशों के दहर में झंडे बुलंद हैं

अशफ़ाक़ रहबर

ये लोग ढूँड रहे हैं यहाँ वहाँ मुझ को

अशफ़ाक़ नासिर

याद रक्खेगा मिरा कौन फ़साना मिरे दोस्त

अशफ़ाक़ नासिर

पीला था चाँद और शजर बे-लिबास थे

अशफ़ाक़ नासिर

मैं सीखता रहा इक उम्र हाव-हू करना

अशफ़ाक़ नासिर

अगर ख़ुशी में तुझे गुनगुनाते लगते हैं

अशफ़ाक़ नासिर

टूटे हुए लोग हैं सलामत

अशफ़ाक़ हुसैन

दिल अजनबी देस में लगा है

अशफ़ाक़ हुसैन

हो गई अपनों की ज़ाहिर दुश्मनी अच्छा हुआ

असग़र वेलोरी

गुलशन गुलशन शोला-ए-गुल की ज़ुल्फ़-ए-सबा की बात चली

असग़र सलीम

गुलशन गुलशन शो'ला-ए-गुल की ज़ुल्फ़-ए-सबा की बात चली

असग़र सलीम

जो लोग मेरा नक़्श-ए-क़दम चूम रहे थे

असग़र राही

रौनक़ तिरे कूचे की बढ़ाने चले आए

असग़र राही

सफ़र से लौट आने वाली हवा

असग़र नदीम सय्यद

अपनी रात लय जाओ

असग़र नदीम सय्यद

ज़िक्र-ए-अस्लाफ़ से बेहतर है कि ख़ामोश रहें

असग़र मेहदी होश

बच्चे खुली फ़ज़ा में कहाँ तक निकल गए

असग़र मेहदी होश

घरौंदे

असग़र मेहदी होश

काम कुछ तो लेना था अपने दीदा-ए-तर से

असग़र मेहदी होश

जला जला के दिए पास पास रखते हैं

असग़र मेहदी होश

आए थे घर में आग लगाने शरीर लोग

असग़र मेहदी होश

पत्थर लिए हर मोड़ पे कुछ लोग खड़े हैं

असग़र गोरखपुरी

इक उम्र मह-ओ-साल की ठोकर में रहा हूँ

असग़र गोरखपुरी

ये नंग-ए-आशिक़ी है सूद ओ हासिल देखने वाले

असग़र गोंडवी

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