नाम Poetry (page 36)

तुम्हारा नाम ले कर दर-ब-दर होता रहूँगा

राशिद आज़र

टूट जाए तो कहीं उस को भी चैन आता है

रशीदा सलीम सीमीं

मिरा नाम क़ैस क्यूँ कर तिरे नाम तक न पहुँचे

रशीद रामपुरी

दिल इश्क़ में उन के हारते हैं

रशीद रामपुरी

यूँ भी इक बज़्म-ए-सदा हम ने सजाई पहरों

रशीद क़ैसरानी

सदियों से मैं इस आँख की पुतली में छुपा था

रशीद क़ैसरानी

सदियों से मैं इस आँख की पुतली में छुपा था

रशीद क़ैसरानी

मुँह किस तरह से मोड़ लूँ ऐसे पयाम से

रशीद क़ैसरानी

अपनी तरह मुझे भी ज़माने में आम कर

रशीद क़ैसरानी

मैं चोब-ए-ख़ुश्क सही वक़्त का हूँ सहरा में

रशीद निसार

कोई तो है कि नए रास्ते दिखाए मुझे

रशीद निसार

ज़िंदगी कहते हैं किस को मौत किस का नाम है

रशीद लखनवी

ठहर जावेद के अरमाँ दिल-ए-मुज़्तर निकलते हैं

रशीद लखनवी

शराब-ए-नाब का क़तरा जो साग़र से निकल जाए

रशीद लखनवी

मार डालेगी हमें ये ख़ुश-बयानी आप की

रशीद लखनवी

हिज्र है अब था यहीं में ज़ार हम पहलू-ए-दोस्त

रशीद लखनवी

दिला मा'शूक़ जो होता है वो सफ़्फ़ाक होता है

रशीद लखनवी

ये किस को जाग जाग के तारों की छाँव में

रशीद कौसर फ़ारूक़ी

तरह-ए-कशां जिसे हिज्रान-ए-यार कहते हैं

रशीद कौसर फ़ारूक़ी

क़ैद में रक्खा गया क़तरा तो ग़लताँ हो गया

रशीद कौसर फ़ारूक़ी

किसे है लौह-ए-वक़्त पर दवाम सोचते रहे

रशीद कामिल

साक़ी जो दिए जाए ये कह कर कि पिए जा

रसा रामपुरी

शेर-ओ-सुख़न का शहर नहीं ये शहर-ए-इज़्ज़त-ए-दारां है

रसा चुग़ताई

मोहब्बत ख़ब्त है या वसवसा है

रसा चुग़ताई

जब तक दौर-ए-जाम चलेगा

रसा चुग़ताई

जनाज़ा धूम से उस आशिक़-ए-जाँ-बाज़ का निकले

रंजूर अज़ीमाबादी

ये जो चार दिन की थी ज़िंदगी इसे तेरे नाम न कर सका

राना आमिर लियाक़त

निगाह तूर पे है और जमाल सीने में

रम्ज़ अज़ीमाबादी

कुछ इस अदा से सफ़ीरान-ए-नौ-बहार चले

रम्ज़ अज़ीमाबादी

जलने का हुनर सिर्फ़ फ़तीले के लिए था

रम्ज़ अज़ीमाबादी

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