नाम Poetry (page 65)

तेरे क़दमों की आहट को तरसा हूँ

आज़ाद गुलाटी

सरहद-ए-जिस्म से बाहर कहीं घर लिक्खा था

आज़ाद गुलाटी

सरहद-ए-जिस्म से बाहर कहीं घर लिक्खा था

आज़ाद गुलाटी

रौशनी फैली तो सब का रंग काला हो गया

आज़ाद गुलाटी

मेरा तो नाम रेत के सागर पे नक़्श है

आज़ाद गुलाटी

ख़ुद हमीं को राहतों के कैफ़ का चसका न था

आज़ाद गुलाटी

सात सुरों का बहता दरिया तेरे नाम

अय्यूब ख़ावर

न कोई दिन न कोई रात इंतिज़ार की है

अय्यूब ख़ावर

न कोई दिन न कोई रात इंतिज़ार की है

अय्यूब ख़ावर

शिकस्ता-दिल की ख़ुशी दोस्तो ख़ुशी तो न थी

औलाद अली रिज़वी

न पूछो कैसे शब-ए-इंतिज़ार गुज़री है

औलाद अली रिज़वी

इक थकन क़ुव्वत-ए-इज़हार में आ जाती है

अतुल अजनबी

मैं कि तुम पे बाज़ हूँ

अतीक़ुल्लाह

कितना मुश्किल है

अतीक़ुल्लाह

हमारे मा-बैन

अतीक़ुल्लाह

कुछ और दिन अभी उस जा क़याम करना था

अतीक़ुल्लाह

कुछ और दिन अभी इस जा क़याम करना था

अतीक़ुल्लाह

ख़ुद को किसी की राह-गुज़र किस लिए करें

अतहर नासिक

बा-वफ़ा था तो मुझे पूछने वाले भी न थे

अतहर नफ़ीस

लम्हों के अज़ाब सह रहा हूँ

अतहर नफ़ीस

कभी साया है कभी धूप मुक़द्दर मेरा

अतहर नफ़ीस

भरोसे का क़त्ल

अतीया दाऊद

वो बात मुझ को तो दुश्नाम सी लगी है 'अतीक़'

अतीक़ असर

उदास बैठा दिए ज़ख़्म के जलाए हुए

अतीक़ अंज़र

सुलगती रेत की क़िस्मत में दरिया लिख दिया जाए

अतीक़ अंज़र

अगरचे लाई थी कल रात कुछ नजात हवा

अतीक़ इलाहाबादी

मेहनत से मिल गया जो दफ़ीने के बीच था

अता तुराब

नूरा

असरार-उल-हक़ मजाज़

मजबूरियाँ

असरार-उल-हक़ मजाज़

साक़ी-ए-गुलफ़ाम बा-सद एहतिमाम आ ही गया

असरार-उल-हक़ मजाज़

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