नाम Poetry (page 63)

गुम-शुदा मौसम का आँखों में कोई सपना सा था

बदनाम नज़र

दीवार-ओ-दर का नाम था कोई मकाँ न था

बदनाम नज़र

आग ही काश लग गई होती

बदीउज़्ज़माँ ख़ावर

दिल ने हम से अजब ही काम लिया

बाबर रहमान शाह

जलती बुझती हुई आँखों में सितारे लिक्खे

अज़रा वहीद

गिरे क़तरों में पत्थर पर सदा ऐसा भी होता है

अज़रा वहीद

उस ने मेरे नाम सूरज चाँद तारे लिख दिया

अज़रा परवीन

बे-ख़ुदा होने के डर में बे-सबब रोता रहा

अज़रा परवीन

हम दोनों

अज़रा अब्बास

एक नज़्म लिखना मुश्किल है

अज़रा अब्बास

ख़ून आँसू बन गया आँखों में भर जाने के ब'अद

अज़्म शाकरी

तुम मोहब्बत का उसे नाम भी दे लो लेकिन

अज़लान शाह

किसी के नाम पे नन्हे दिए जलाते हुए

अज़लान शाह

समझ के रस्ता इधर से गुज़रने वालों ने

अज़लान शाह

किसी के नाम पे नन्हे दिए जलाते हुए

अज़लान शाह

हारे हुए लोगों की कहानी की तरह हैं

अज़लान शाह

दूसरा रुख़ नहीं जिस का उसी तस्वीर का है

अज़लान शाह

ज़िंदगी यूँ तो गुज़र जाती है आराम के साथ

अज़ीज़ तमन्नाई

उसी ने साथ दिया ज़िंदगी की राहों में

अज़ीज़ तमन्नाई

कमाल-ए-हुस्न का जब भी ख़याल आया है

अज़ीज़ साबरी

बाक़ीस्त शब-ए-फ़ित्ना

अज़ीज़ क़ैसी

ये किस वहशत-ज़दा लम्हे में दाख़िल हो गए हैं

अज़ीज़ नबील

मिरा सवाल है ऐ क़ातिलान-ए-शब तुम से

अज़ीज़ नबील

हयात-ओ-काएनात पर किताब लिख रहे थे हम

अज़ीज़ नबील

चश्म-ए-साक़ी का तसव्वुर बज़्म में काम आ गया

अज़ीज़ लखनवी

ज़िंदगी नाम है मोहब्बत का

अज़ीज़ हैदराबादी

शहर जिन के नाम से ज़िंदा था वो सब उठ गए

अज़ीज़ हामिद मदनी

जो बात दिल में थी उस से नहीं कही हम ने

अज़ीज़ हामिद मदनी

वही दाग़-ए-लाला की बात है कि ब-नाम-ए-हुस्न उधर गई

अज़ीज़ हामिद मदनी

न फ़ासले कोई निकले न क़ुर्बतें निकलीं

अज़ीज़ हामिद मदनी

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