नाम Poetry (page 62)

ग़ैरत-ए-गुल है तू और चाक-गरेबाँ हम हैं

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

छुप के नज़रों से इन आँखों की फ़रामोश की राह

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

शोर-ए-दरिया है कहानी मेरी

बाक़र नक़वी

सैलाब-ए-ज़िंदगी के सहारे बढ़े चलो

बाक़र मेहदी

कभी तो भूल गए पी के नाम तक उन का

बाक़र मेहदी

नई जुस्तुजू का अलमिया

बाक़र मेहदी

लहरों का आतिश-फ़िशाँ

बाक़र मेहदी

अलविदा'अ

बाक़र मेहदी

सादा काग़ज़ पे कोई नाम कभी लिख लेना!

बाक़र मेहदी

हज़ार चाहा लगाएँ किसी से दिल लेकिन

बाक़र मेहदी

चाहा बहुत कि इश्क़ की फिर इब्तिदा न हो

बाक़र मेहदी

अब ख़ानुमाँ-ख़राब की मंज़िल यहाँ नहीं

बाक़र मेहदी

दिल में दिलदार निहाँ था मुझे मा'लूम न था

बाक़र आगाह वेलोरी

वा'दे झूटे क़स्में झूटी

बक़ा बलूच

कम कम रहना ग़म के सुर्ख़ जज़ीरों में

बक़ा बलूच

तर्सील

बलराज कोमल

ड्रग स्टोर

बलराज कोमल

दीदा-ए-तर

बलराज कोमल

चुटकियाँ लेती है गोयाई किसे आवाज़ दूँ

बलराज हयात

ज़ेर-ए-लब रख छुपा के नाम उस का

बकुल देव

दिल से बे-सूद और जाँ से ख़राब

बकुल देव

तिश्नगी-ए-लब पे हम अक्स-ए-आब लिक्खेंगे

बख़्श लाइलपूरी

तमन्ना है ये दिल में जब तलक है दम में दम अपने

ज़फ़र

हम ही उन को बाम पे लाए और हमीं महरूम रहे

ज़फ़र

वो सौ सौ अठखटों से घर से बाहर दो क़दम निकले

ज़फ़र

टुकड़े नहीं हैं आँसुओं में दिल के चार पाँच

ज़फ़र

देखो इंसाँ ख़ाक का पुतला बना क्या चीज़ है

ज़फ़र

ख़बर शाकी है

बद्र वास्ती

फल दरख़्तों से गिरे थे आँधियों में थाल भर

बद्र वास्ती

जो झुक के मिलते थे जलसों में मेहरबाँ की तरह

बदनाम नज़र

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