ग़ैरत-ए-गुल है तू और चाक-गरेबाँ हम हैं
ग़ैरत-ए-गुल है तू और चाक-गरेबाँ हम हैं
रश्क-ए-सुम्बुल है तिरी ज़ुल्फ़ परेशाँ हम हैं
ना-तवाँ चश्म तिरी हम हैं असा के मुहताज
नित की बीमार वो और तालिब-ए-दरमाँ हम हैं
रश्क-ए-तूती है ख़त-ए-सब्ज़ तिरा हम गोया
दोनों आरिज़ हैं तिरे आइना हैराँ हम हैं
आज-कल हाए तिरे नाज़ के हाथों ऐ यार
सदमा पहुँचे है तिरे क़ल्ब को नालाँ हम हैं
लाला-रूयों की मोहब्बत में अब ऐ सर्व-ए-सही
सर-ब-सर दाग़ तू और सर्व-ए-ख़िरामाँ हम हैं
हम असीर-ए-ख़म-ए-मू तेरे हमारा तू राम
ख़ातिम-ए-जम है तिरे पास सुलैमाँ हम हैं
तू सुख़न-संज 'बक़ा' नाम हमारा मशहूर
ख़ातिम-ए-जम है तिरे पास सुलैमाँ हम हैं
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