नाम Poetry (page 70)
इस वास्ते दामन चाक किया शायद ये जुनूँ काम आ जाए
अनवर मिर्ज़ापुरी
बड़े सुकून से ख़ुद अपने हम-सरों में रहे
अनवर मीनाई
मेरी पहली नज़्म
अनवर मसूद
सोचना रूह में काँटे से बिछाए रखना
अनवर मसूद
अब नाम नहीं काम का क़ाएल है ज़माना
अनवर जलालपुरी
शादाब-ओ-शगुफ़्ता कोई गुलशन न मिलेगा
अनवर जलालपुरी
उन से हम लौ लगाए बैठे हैं
अनवर देहलवी
अश्क बेताब व निगह बे-बाक व चश्म-ए-तर ख़राब
अनवर देहलवी
आँखें दिखाईं ग़ैर को मेरी ख़ता के साथ
अनवर देहलवी
कब लज़्ज़तों ने ज़ेहन का पीछा नहीं किया
अनवर अंजुम
चुप बैठा में अक्सर सोचता रहता हूँ
अनवर अंजुम
जब मिरी ज़ीस्त के उनवाँ नए मतलूब हुए
अनवर मोअज़्ज़म
आओ देखें अहल-ए-वफ़ा की होती है तौक़ीर कहाँ
अनवर मोअज़्ज़म
शहर-दर-शहर फ़ज़ाओं में धुआँ है अब के
अनवर महमूद खालिद
ये दिल ही जानता है फिर कहाँ कहाँ भटके
अनुभव गुप्ता
पुराना ज़हर नए नाम से मिला है मुझे
अंजुम सलीमी
मैं चीख़ता रहा कुछ और भी है मेरा इलाज
अंजुम सलीमी
एक बे-नाम उदासी से भरा बैठा हूँ
अंजुम सलीमी
आधी मौत का जन्म
अंजुम सलीमी
इन दिनों ख़ुद से फ़राग़त ही फ़राग़त है मुझे
अंजुम सलीमी
दिन ले के जाऊँ साथ उसे शाम कर के आऊँ
अंजुम सलीमी
दर्द-ए-विरासत पा लेने से नाम नहीं चल सकता
अंजुम सलीमी
नहीं नाम-ओ-निशाँ साए का लेकिन यार बैठे हैं
अंजुम रूमानी
कुछ अजनबी से लोग थे कुछ अजनबी से हम
अंजुम रूमानी
दिन हो कि रात, कुंज-ए-क़फ़स हो कि सेहन-ए-बाग़
अंजुम रूमानी
दिन हो कि रात कुंज-ए-क़फ़स हो कि सेहन-ए-बाग़
अंजुम रूमानी
हज़ारों साल चलने कि सज़ा है
अंजुम लुधियानवी
कोई तोहमत हो मिरे नाम चली आती है
अंजुम ख़याली
इस नाम का कोई भी नहीं है
अंजुम ख़याली
शब-ए-फ़िराक़ अचानक ख़याल आया मुझे
अंजुम ख़याली
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