नज़र Poetry (page 37)

आसमाँ कुछ भी नहीं अब तेरे करने के लिए

शहरयार

कार-ए-जहाँ दराज़ है

शहराम सर्मदी

सुन रखा था तजरबा लेकिन ये पहला था मिरा

शहराम सर्मदी

किसी से हाथ किसी से नज़र मिलाते हुए

शहनाज़ नूर

हवा के हौसले ज़ंजीर करना चाहता है

शहनाज़ नूर

ज़मीं थम गई है

शहनाज़ नबी

वो सामने हों मिरे और नज़र झुकी न रहे

शहनाज़ मुज़म्मिल

वफ़ा-परस्त जहान-ए-वफ़ा को ले डूबे

शाहजहाँ बानो याद

है शर्त क़ीमत-ए-हुनर भी अब तो रब्त-ए-ख़ास पर

शाहिदा तबस्सुम

इक हुजूम-ए-गिर्या की हर नज़र तमाशाई

शाहिदा तबस्सुम

एहसास तो मुझी पे कर रही है

शाहिदा हसन

ज़ेहन में लगता है जब ख़ुश-रंग लफ़्ज़ों का हुजूम

शाहिद मीर

न जाने क्या हुए अतराफ़ देखने वाले

शाहिद मीर

एक इक मौज को सोने की क़बा देती है

शाहिद लतीफ़

दूर सहरा में जहाँ धूप शजर रखती है

शाहिद लतीफ़

आज भी जिस की है उम्मीद वो कल आए हुए

शाहिद लतीफ़

में क्या हूँ कौन हूँ ये बताने से मैं रहा

शाहिद कमाल

जो मिरी पुश्त में पैवस्त है उस तीर को देख

शाहिद कमाल

चश्म-ए-ख़ुश-आब की तमसील में रहने वाले

शाहिद कमाल

हर आइने में बदन अपना बे-लिबास हुआ

शाहिद कबीर

मिरी नज़र कि तरह दिल परिंद ओझल है

शाहिद जमील

इन सभी दरख़्तों को आँधियों ने घेरा है

शाहिद ग़ाज़ी

ए'तिराफ़

शाहिद अख़्तर

सुकूँ का एक भी लम्हा जो दिल को मिलता है

शाहीन सिद्दीक़ी

रंग-ए-नज़र से हुस्न-ए-तमन्ना निखार के

शाहीन सिद्दीक़ी

अगर ये रौशनी क़ल्ब ओ नज़र से आई है

शाहीन मुफ़्ती

शहर से बाहर निकलते रास्ते

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

मौसम की विरासत

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

हैरानी का बोझ

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

दुनिया तो ये कहती है

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

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