नज़र Poetry (page 34)

ये नर्म हाथ मरे हाथ में थमा दीजे

अनवर अंजुम

कोई सदा न दूर तलक नक़्श-ए-पा कोई

अनवर अंजुम

कब लज़्ज़तों ने ज़ेहन का पीछा नहीं किया

अनवर अंजुम

ये क़िस्सा-ए-ग़म-ए-दिल है तो बाँकपन से चले

अनवर मोअज़्ज़म

ग़म-ए-हबीब ग़म-ए-दो-जहाँ नहीं होता

अनवर मोअज़्ज़म

सरगोशी

अंजुम सलीमी

गिर्या

अंजुम सलीमी

है जो तासीर सी फ़ुग़ाँ में अभी

अंजुम रूमानी

सितमगरों से डरूँ चुप रहूँ निबाह करूँ

अंजुम ख़लीक़

शीशा ही चाहिए न मय-ए-अर्ग़वाँ मुझे

अनीस अहमद अनीस

चलो ये सच ही सही होगा ना-गहाँ गुज़रे

अनीस अहमद अनीस

कोई अदा-शनास-ए-मोहब्बत हमें बताए

अंदलीब शादानी

क़हर की क्यूँ निगाह है प्यारे

आनंद नारायण मुल्ला

दुनिया है ये किसी का न इस में क़ुसूर था

आनंद नारायण मुल्ला

छुप के दुनिया से सवाद-ए-दिल-ए-ख़ामोश में आ

आनंद नारायण मुल्ला

बशर को मशअ'ल-ए-ईमाँ से आगही न मिली

आनंद नारायण मुल्ला

क़दम क़दम पे हमें रंग-ओ-बू का धोका है

अमृत लाल इशरत

मुझे दैर भी हो क्यूँ कर न हरम की तरह प्यारा

अमजद नजमी

ज़रा सी बात

अमजद इस्लाम अमजद

मोहब्बत की एक नज़्म

अमजद इस्लाम अमजद

एक कमरा-ए-इम्तिहान में

अमजद इस्लाम अमजद

याद के सहरा में कुछ तो ज़िंदगी आए नज़र

अमजद इस्लाम अमजद

तू नहीं तेरा इस्तिआरा नहीं

अमजद इस्लाम अमजद

भूले से भी न जानिब-ए-अग़्यार देखना

अमीरुल्लाह तस्लीम

ख़्वाब जो बिखर गए

आमिर उस्मानी

सहर की जुम्बिश क़द-ए-मतानत पे रह गई थी

आमिर नज़र

नुक़्ता-ए-बे-नूर ने मिनहाज-ए-इम्काँ कर दिया

आमिर नज़र

खुला है तेरे बदन का भी इस्तिआरा कुछ

आमिर नज़र

नदी के पार उजाला दिखाई देता है

अमीर क़ज़लबाश

कहीं सलीब कहीं कर्बला नज़र आए

अमीर क़ज़लबाश

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