नज़र Poetry (page 35)

ज़ब्त देखो उधर निगाह न की

अमीर मीनाई

वो दुश्मनी से देखते हैं देखते तो हैं

अमीर मीनाई

सीधी निगाह में तिरी हैं तीर के ख़्वास

अमीर मीनाई

न बेवफ़ाई का डर था न ग़म जुदाई का

अमीर मीनाई

मिरे बस में या तो या-रब वो सितम-शिआर होता

अमीर मीनाई

जब से बाँधा है तसव्वुर उस रुख़-ए-पुर-नूर का

अमीर मीनाई

हटाओ आइना उम्मीद-वार हम भी हैं

अमीर मीनाई

मौत मेरी जान मौत

अमीक़ हनफ़ी

यूँ दिल है सर-ब-सज्दा किसी के हुज़ूर में

अमीन हज़ीं

तिरी निगाह बनी आइना मिरी ख़ातिर

अम्बर वसीम इलाहाबादी

मिला भी ज़ीस्त में क्या रन्ज-ए-रह-गुज़ार से कम

अंबरीन हसीब अंबर

शब ख़्वाब के जज़ीरों में हँस कर गुज़र गई

अम्बर बहराईची

उलझा दिल-ए-सितम-ज़दा ज़ुल्फ़-ए-बुताँ से आज

अमानत लखनवी

हुब्ब-ए-वतन

अल्ताफ़ हुसैन हाली

बरखा-रुत

अल्ताफ़ हुसैन हाली

कर के बीमार दी दवा तू ने

अल्ताफ़ हुसैन हाली

मिरी क़ुर्बतों की ख़ातिर यूँही बे-क़रार होता

आलोक यादव

सौ सौ उमीदें बंधती है इक इक निगाह पर

अल्लामा इक़बाल

मिरी निगाह में वो रिंद ही नहीं साक़ी

अल्लामा इक़बाल

फ़क़त निगाह से होता है फ़ैसला दिल का

अल्लामा इक़बाल

ज़ौक़ ओ शौक़

अल्लामा इक़बाल

तुलू-ए-इस्लाम

अल्लामा इक़बाल

मिर्ज़ा 'ग़ालिब'

अल्लामा इक़बाल

मार्च 1907

अल्लामा इक़बाल

इबलीस की मजलिस-ए-शूरा

अल्लामा इक़बाल

ज़मीर-ए-लाला मय-ए-लाल से हुआ लबरेज़

अल्लामा इक़बाल

वो हर्फ़-ए-राज़ कि मुझ को सिखा गया है जुनूँ

अल्लामा इक़बाल

तिरी निगाह फ़रोमाया हाथ है कोताह

अल्लामा इक़बाल

निगाह-ए-फ़क़्र में शान-ए-सिकंदरी क्या है

अल्लामा इक़बाल

न तख़्त-ओ-ताज में ने लश्कर-ओ-सिपाह में है

अल्लामा इक़बाल

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