नूर Poetry (page 7)

सूरज की किरन देख के बेज़ार हुए हो

शहज़ाद अहमद

कितनी बे-नूर थी दिन भर नज़र-ए-परवाना

शहज़ाद अहमद

कब तक कड़कती धूप में आँखें जलाएँ हम

शहज़ाद अहमद

इबलीस भी रख लेते हैं जब नाम फ़रिश्ते

शहज़ाद अहमद

दिल का बुरा नहीं मगर शख़्स अजीब ढब का है

शहज़ाद अहमद

दिल बहुत मसरूफ़ था कल आज बे-कारों में है

शहज़ाद अहमद

बिखरे हुए तारों से मिरी रात भरी है

शहज़ाद अहमद

बाग़-ए-बहिश्त के मकीं कहते हैं मर्हबा मुझे

शहज़ाद अहमद

अक़्ल हर बात पे हैराँ है इसे क्या कहिए

शहज़ाद अहमद

उम्मीद ओ बीम

शहरयार

नफ़ी से इसबात तक

शहरयार

अहद-ए-हाज़िर की दिल-रुबा मख़्लूक़

शहरयार

शहर-ए-जुनूँ में कल तलक जो भी था सब बदल गया

शहरयार

हज़ार बार मिटी और पाएमाल हुई है

शहरयार

दयार-ए-दिल न रहा बज़्म-ए-दोस्ताँ न रही

शहरयार

आदाब ज़िंदगी से बहुत दूर हो गया

शहूद आलम आफ़ाक़ी

नन्हा सा दिया है कि तह-ए-आब है रौशन

शाहिद कमाल

पहाड़ होने का सारा ग़ुरूर काँप उठा

शाहिद जमाल

ऐ निगार-ए-ग़म-ओ-आलाम तिरी उम्र दराज़

शाहिद अहमद शोएब

ऐ निगार-ए-ग़म-ओ-आलाम तिरी उम्र दराज़

शाहिद अहमद शोएब

कब गवारा है मुझे और कहीं पर चमके

शहबाज़ ख़्वाजा

तस्ख़ीर-ए-फ़ितरत के बअ'द

शहाब जाफ़री

तलाश

शहाब जाफ़री

शहर-ए-अना में

शहाब जाफ़री

मैं

शहाब जाफ़री

अब कहाँ ले के छुपें उर्यां बदन और तन जला

शहाब जाफ़री

यारो नहीं इतना मुझे क़ातिल ने सताया

शाह नसीर

वाँ कमर बाँधे हैं मिज़्गाँ क़त्ल पर दोनों तरफ़

शाह नसीर

न क्यूँ कि अश्क-ए-मुसलसल हो रहनुमा दिल का

शाह नसीर

इस्लाम और कुफ़्र हमारा ही नाम है

शाह आसिम

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