नूर Poetry (page 6)

नहीं सबात बुलंदी-ए-इज्ज़-ओ-शाँ के लिए

ज़ौक़

दिखला न ख़ाल-ए-नाफ़ तू ऐ गुल-बदन मुझे

ज़ौक़

पाँव में दूर का सफ़र चमके

शीन काफ़ निज़ाम

रतजगा

शाज़ तमकनत

नफ़स नफ़स है तिरे ग़म से चूर चूर अब तक

शाज़ तमकनत

कोई तो आ के रुला दे कि हँस रहा हूँ मैं

शाज़ तमकनत

बना हुस्न-ए-तकल्लुम हुस्न-ए-ज़न आहिस्ता आहिस्ता

शाज़ तमकनत

ज़ाविए फ़िक्र के अब और बनाओ यारो

शौक़ सालकी

तीन शामों की एक शाम

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

माह-ए-मुनीर

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

अँधेरी शब से एक ला-हासिल

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

सुर्ख़ सीधा सख़्त नीला दूर ऊँचा आसमाँ

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

महफ़िल का नूर मरजा-ए-अग़्यार कौन है

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

रौशनी तेज़ करो

शमीम करहानी

खंडर

शमीम करहानी

बे-पर्दा उस का चेहरा-ए-पुर-नूर तो हुआ

शाकिर कलकत्तवी

याद तुम आए तो फिर बन गईं बादल आँखें

शकील शम्सी

तन्हाई

शकील जाज़िब

इक शहंशाह ने बनवा के....

शकील बदायुनी

वो हम से दूर होते जा रहे हैं

शकील बदायुनी

ख़ाना-ए-उम्मीद बे-नूर-ओ-ज़िया होने को है

शकील बदायुनी

वो सामने था फिर भी कहाँ सामना हुआ

शकेब जलाली

बस इक शुआ-ए-नूर से साया सिमट गया

शकेब जलाली

जुनून-ए-इश्क़ की आमादगी ने कुछ न दिया

शाइस्ता सहर

कहीं वो सूरत-ए-ख़ूबाँ हुआ है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जिस ने आदम के तईं जाँ बख़्शा

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

देखना उस की तजल्ली का जिसे मंज़ूर है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

करो बे-नूर महफ़िल-ए-इमरोज़

शहज़ाद अहमद

आँखें न खुलें नूर के सैलाब में मेरी

शहज़ाद अहमद

यूँ ख़ाक की मानिंद न राहों पे बिखर जा

शहज़ाद अहमद

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