उम्मीद Poetry (page 17)

बीते रिश्ते तलाश करती है

गुलज़ार

किसी की याद का चेहरा

गुलनाज़ कौसर

शजर-ए-उम्मीद भी जल गया वो वफ़ा की शाख़ भी जल गई

गुलनार आफ़रीन

बहार इस धूम से आई गई उम्मीद जीने की

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी

उस शोख़ से क्या कीजिए इज़्हार-ए-तमन्ना

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी

जो यूँ आप बैरून-ए-दर जाएँगे

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी

जहाँ में कहाँ बाहम उल्फ़त रही है

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी

अपना हर उज़्व चश्म-ए-बीना है

गोया फ़क़ीर मोहम्मद

शेर जब खुलता है खुलते हैं मआनी क्या क्या

गोविन्द गुलशन

आप जब चेहरा बदल कर आ गए

गोविन्द गुलशन

बहुत वाक़िफ़ हैं लब-ए-आह-ओ-फ़ुग़ाँ से

गोर बचन सिंह दयाल मग़मूम

अपने अशआर को रुस्वा सर-ए-बाज़ार करूँ

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

तिरी नवेद में हर दास्ताँ को सुनते हैं

ग़ुलाम मौला क़लक़

उठने में दर्द-ए-मुत्तसिल हूँ मैं

ग़ुलाम मौला क़लक़

उन से कहा कि सिद्क़-ए-मोहब्बत मगर दरोग़

ग़ुलाम मौला क़लक़

तेरे दर पर मक़ाम रखते हैं

ग़ुलाम मौला क़लक़

रिश्ता-ए-रस्म-ए-मोहब्बत मत तोड़

ग़ुलाम मौला क़लक़

राज़-ए-दिल दोस्त को सुना बैठे

ग़ुलाम मौला क़लक़

न हो आरज़ू कुछ यही आरज़ू है

ग़ुलाम मौला क़लक़

ख़त ज़मीं पर न ऐ फ़ुसूँ-गर काट

ग़ुलाम मौला क़लक़

जो दिलबर की मोहब्बत दिल से बदले

ग़ुलाम मौला क़लक़

आए क्या तेरा तसव्वुर ध्यान में

ग़ुलाम मौला क़लक़

कहते हैं ईद है आज अपनी भी ईद होती

ग़ुलाम भीक नैरंग

रही न ताक़त-ए-गुफ़्तार और अगर हो भी

ग़ालिब

मुनहसिर मरने पे हो जिस की उमीद

ग़ालिब

कोई उम्मीद बर नहीं आती

ग़ालिब

कहते हैं जीते हैं उम्मीद पे लोग

ग़ालिब

हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद

ग़ालिब

वाँ पहुँच कर जो ग़श आता पए-हम है हम को

ग़ालिब

नक़्श-ए-नाज़-ए-बुत-ए-तन्नाज़ ब-आग़ोश-ए-रक़ीब

ग़ालिब

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