पानी Poetry (page 33)

जला जला के दिए पास पास रखते हैं

असग़र मेहदी होश

बे-निशान क़दमों की कहकशाँ पकड़ते हैं

असग़र मेहदी होश

बाहर का माहौल तो हम को अक्सर अच्छा लगता है

असग़र मेहदी होश

चलते चलते रुक जाता है

असग़र गोरखपुरी

ये नंग-ए-आशिक़ी है सूद ओ हासिल देखने वाले

असग़र गोंडवी

इन अक़्ल के बंदों में आशुफ़्ता-सरी क्यूँ है

असद मुल्तानी

सिर्फ़ कहने को कोई अज़्मत-निशाँ बनता नहीं

असद जाफ़री

बारिश की नज़्म

असअ'द बदायुनी

रौशनी में किस क़दर दीवार-ओ-दर अच्छे लगे

असअ'द बदायुनी

सीने में ज़ब्त-ए-ग़म से छाला उभर रहा है

आरज़ू लखनवी

किस ने भीगे हुए बालों से ये झटका पानी

आरज़ू लखनवी

तस्कीन-ए-दिल का ये क्या क़रीना

आरज़ू लखनवी

रस उन आँखों का है कहने को ज़रा सा पानी

आरज़ू लखनवी

क़ुर्बत बढ़ा बढ़ा कर बे-ख़ुद बना रहे हैं

आरज़ू लखनवी

पियूँ ही क्यूँ जो बुरा जानूँ और छुपा के पियूँ

आरज़ू लखनवी

नज़र उस चश्म पे है जाम लिए बैठा हूँ

आरज़ू लखनवी

मिरे जोश-ए-ग़म की है अजब कहानी

आरज़ू लखनवी

मासूम नज़र का भोला-पन ललचा के लुभाना क्या जाने

आरज़ू लखनवी

कुछ मैं ने कही है न अभी उस ने सुनी है

आरज़ू लखनवी

किस मस्त अदा से आँख लड़ी मतवाला बना लहरा के गिरा

आरज़ू लखनवी

हर साँस है इक नग़्मा हर नग़्मा है मस्ताना

आरज़ू लखनवी

कुछ दर्जा और गर्मी-ए-बाज़ार हो बुलंद

अरशद जमाल हश्मी

तिलाई रंग जानाँ का अगर मज़मून लिखूँ ख़त में

अरशद अली ख़ान क़लक़

जुनूँ बरसाए पत्थर आसमाँ ने मज़रा-ए-जाँ पर

अरशद अली ख़ान क़लक़

मिरे ख़ेमे ख़स्ता-हाल में हैं मिरे रस्ते धुँद के जाल में हैं

अरशद अब्दुल हमीद

ज़ख़्म-ए-दिल भी दिखा के देख लिया

अर्श मलसियानी

भूल गया ख़ुश्की में रवानी

अरमान नज्मी

देख लो गे ख़ुद!

आरिफ़ा शहज़ाद

अंधे अदम वजूद के गिर्दाब से निकल

आरिफ़ शफ़ीक़

अल्फ़ाज़ के पत्थर क्या फेंके गए पानी में

आरिफ़ अंसारी

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