रास्ता Poetry (page 60)

समझ के रस्ता इधर से गुज़रने वालों ने

अज़लान शाह

तिरी तलाश में निकले हैं तेरे दीवाने

अज़ीज़ वारसी

सफ़र मुदाम सफ़र

अज़ीज़ तमन्नाई

क़िस्सा-ए-दर्द

अज़ीज़ तमन्नाई

परछाइयाँ

अज़ीज़ तमन्नाई

मेरी आहट

अज़ीज़ तमन्नाई

हर आईना इक अक्स-ए-नौ ढूँडता है

अज़ीज़ तमन्नाई

यूँही कटे न रहगुज़र-ए-मुख़्तसर कहीं

अज़ीज़ तमन्नाई

कमाल-ए-हुस्न का जब भी ख़याल आया है

अज़ीज़ साबरी

रफ़्तगाँ

अज़ीज़ क़ैसी

मिटा के अंजुमन-ए-आरज़ू सदा दी है

अज़ीज़ क़ैसी

आह-ए-बे-असर निकली नाला ना-रसा निकला

अज़ीज़ क़ैसी

न जाने कैसी महरूमी पस-ए-रफ़्तार चलती है

अज़ीज़ नबील

तिरी कोशिश हम ऐ दिल सई-ए-ला-हासिल समझते हैं

अज़ीज़ लखनवी

हम को सँभालता कोई क्या राह-ए-इश्क़ में

अज़ीज़ हैदराबादी

बढ़ गईं गुस्ताख़ियाँ मेरी सज़ा के साथ साथ

अज़ीज़ हैदराबादी

ज़ंजीर-ए-पा से आहन-ए-शमशीर है तलब

अज़ीज़ हामिद मदनी

वही दाग़-ए-लाला की बात है कि ब-नाम-ए-हुस्न उधर गई

अज़ीज़ हामिद मदनी

नावक-ए-ताज़ा दिल पर मारा जंग पुरानी जारी की

अज़ीज़ हामिद मदनी

ऐ शहर-ए-ख़िरद की ताज़ा हवा वहशत का कोई इनआम चले

अज़ीज़ हामिद मदनी

आज मुक़ाबला है सख़्त मीर-ए-सिपाह के लिए

अज़ीज़ हामिद मदनी

ये हौसला भी किसी रोज़ कर के देखूँगी

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

टटोलता हुआ कुछ जिस्म ओ जान तक पहुँचा

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

वक़्त जब राह की दीवार हुआ

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़

जुनूँ-नवाज़ सफ़र का ख़याल क्यूँ आया

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़

हर एक राह में इम्कान-ए-हादिसा है अभी

अज़हर नैयर

एक मंज़िल है मगर राह कई हैं 'अज़हर'

अज़हर लखनवी

देखिए चलता है पैमाना किधर से पहले

अज़हर लखनवी

उजाला दश्त-ए-जुनूँ में बढ़ाना पड़ता है

अज़हर इनायती

अभी बिछड़ा है वो कुछ रोज़ तो याद आएगा

अज़हर इनायती

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