रास्ता Poetry (page 68)

मौज-दर-मौज तो साहिल की रगों पर दौड़े

आमिर नज़र

तुम राह में चुप-चाप खड़े हो तो गए हो

अमीर क़ज़लबाश

अपने हमराह ख़ुद चला करना

अमीर क़ज़लबाश

मेरी पहचान है क्या मेरा पता दे मुझ को

अमीर क़ज़लबाश

ख़ुद अपने साथ सफ़र में रहे तो अच्छा है

अमीर क़ज़लबाश

हर रहगुज़र में काहकशाँ छोड़ जाऊँगा

अमीर क़ज़लबाश

बनते हैं फ़रज़ाने लोग

अमीर क़ज़लबाश

अपने हमराह ख़ुद चला करना

अमीर क़ज़लबाश

न बेवफ़ाई का डर था न ग़म जुदाई का

अमीर मीनाई

मिरे बस में या तो या-रब वो सितम-शिआर होता

अमीर मीनाई

कुछ ख़ार ही नहीं मिरे दामन के यार हैं

अमीर मीनाई

इस बार राह-ए-इश्क़ कुछ इतनी तवील थी

अमीर इमाम

ये कार-ए-ज़िंदगी था तो करना पड़ा मुझे

अमीर इमाम

काँधों से ज़िंदगी को उतरने नहीं दिया

अमीर इमाम

हाए शिद्दत की कमी

अमीक़ हनफ़ी

है नूर-ए-ख़ुदा भी यहाँ इरफ़ान-ए-ख़ुदा भी

अमीक़ हनफ़ी

बीन हवा के हाथों में है लहरे जादू वाले हैं

अमीक़ हनफ़ी

तीरगी ही तीरगी है बाम-ओ-दर में कौन है

अमीन राहत चुग़ताई

मंज़िल-ए-शम्स-ओ-क़मर से गुज़रे

अमीन राहत चुग़ताई

कहीं सानेहे मिलेंगे कहीं हादिसा मिलेगा

अम्बर वसीम इलाहाबादी

ग़म-ए-उल्फ़त में डूबे थे उभरना भी ज़रूरी था

अम्बर जोशी

दस्तरस

अम्बरीन सलाहुद्दीन

क्यूँ अम्बर की पहनाई में चुप की राह टटोलें

अम्बरीन सलाहुद्दीन

मैं ने सोचा है रात-भर तुम को

अंबरीन हसीब अंबर

इक गली से ख़ुश्बू की रस्म-ओ-राह काफ़ी है

अंबरीन हसीब अंबर

रंग काला है न है पैकर सियाह

अम्बर शमीम

कोई दीवार न दर बाक़ी है

अम्बर शमीम

क्यूँ न हों शाद कि हम राहगुज़र में हैं अभी

अम्बर बहराईची

हर तरफ़ उस के सुनहरे लफ़्ज़ हैं फैले हुए

अम्बर बहराईची

उलझा दिल-ए-सितम-ज़दा ज़ुल्फ़-ए-बुताँ से आज

अमानत लखनवी

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