रात Poetry (page 59)

फूल ने टहनी से उड़ने की कोशिश की

गुलज़ार

ओस पड़ी थी रात बहुत और कोहरा था गर्माइश पर

गुलज़ार

खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं

गुलज़ार

काँच के पीछे चाँद भी था और काँच के ऊपर काई भी

गुलज़ार

हर एक ग़म निचोड़ के हर इक बरस जिए

गुलज़ार

उठो गले से लिपट जाओ फिर निखर लेना

गुलशनुद्दौला बहार

न कोई दीन होता है न कोई ज़ात होती है

गुलशन बरेलवी

किसी की याद का चेहरा

गुलनाज़ कौसर

शजर-ए-उम्मीद भी जल गया वो वफ़ा की शाख़ भी जल गई

गुलनार आफ़रीन

इश्क़ अहद-ए-बेवफ़ा में बे-नवा हो जाएगा

ग़ुलाम नबी आवान

तू अंग अंग में ख़ुश्बू सी बन गया होगा

गुलाम जीलानी असग़र

चराग़ से कभी तारों से रौशनी माँगे

गुहर खैराबादी

नज़्ज़ारा-ए-रुख़-ए-साक़ी से मुझ को मस्ती है

गोया फ़क़ीर मोहम्मद

क्यूँकर न ख़ुश हो सर मिरा लटक्का के दार में

गोया फ़क़ीर मोहम्मद

तुलू-ए-शब

गोपाल मित्तल

इश्क़ में कब ये ज़रूरी है कि रोया जाए

गोपाल मित्तल

रोज़ रौशन रहें हालात ज़रूरी तो नहीं

गोपाल कृष्णा शफ़क़

दिए से लौ नहीं पिंदार ले कर जा रही है

ग़ज़ाला शाहिद

ठहर ठहर के मिरा इंतिज़ार करता चल

ग़ुलाम मुर्तज़ा राही

शक्ल सहरा की हमेशा जानी-पहचानी रहे

ग़ुलाम मुर्तज़ा राही

जो मुझ पे भारी हुई एक रात अच्छी तरह

ग़ुलाम मुर्तज़ा राही

मुझ को ग़रीब और क़रज़-दार देख कर

ग़ुलाम मोहम्मद वामिक़

कहफ़-उल-क़हत

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

ज़ेहन में दाएरे से बनाता रहा दूर ही दूर से मुस्कुराता रहा

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

पहले इक शख़्स मेरी ज़ात बना

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

ख़ामोश थे तुम और बोलता था बस एक सितारा आँखों में

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

हम ने तो बे-शुमार बहाने बनाए हैं

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

अक्स की सूरत दिखा कर आप का सानी मुझे

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

अकेला दिन है कोई और न तन्हा रात होती है

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

आफ़ाक़ में फैले हुए मंज़र से निकल कर

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.