रंग Poetry (page 80)

हवस का रंग चढ़ा उस पे और उतर भी गया

अक़ील शादाब

तय न कर पाई मंज़िलें तितली

अक़ील जामिद

हुस्न हर रंग में मख़्सूस कशिश रखता है

अनवापुल हसन अनवार

सारे कुश्तों से जुदा ढंग इज़्तिराब-ए-दिल का है

अनवरी जहाँ बेगम हिजाब

कहाँ मुमकिन है पोशीदा ग़म-ए-दिल का असर होना

अनवरी जहाँ बेगम हिजाब

वो रंग रंग के छींटे पड़े कि उस के ब'अद

अनवर शऊर

न सह सकूँगा ग़म-ए-ज़ात गो अकेला मैं

अनवर शऊर

मुश्ताक़ ब-दस्तूर ज़माना है तुम्हारा

अनवर शऊर

ब'अद-अज़-मर्ग

अनवर सेन रॉय

वो पर्दे से निकल कर सामने जब बे-हिजाब आया

अनवर सहारनपुरी

क्यूँ ख़फ़ा हम से हो ख़ता क्या है

अनवर सहारनपुरी

जब फ़स्ल-ए-बहाराँ आती है शादाब गुलिस्ताँ होते हैं

अनवर सहारनपुरी

एक ख़्वाहिश

अनवर सदीद

तू जिस्म है तो मुझ से लिपट कर कलाम कर

अनवर सदीद

ख़्वाबों की तफ़्सील बता कर जाएँगे

अनवर सदीद

न होंगे हम तो ये रंग-ए-गुलिस्ताँ कौन देखेगा

अनवर साबरी

लब पे काँटों के है फ़रियाद-ओ-बुका मेरे बाद

अनवर साबरी

रुख़ से पर्दा उठा दे ज़रा साक़िया बस अभी रंग-ए-महफ़िल बदल जाएगा

अनवर मिर्ज़ापुरी

महफ़ूज़ रहेगा क्या एहसास का आईना

अनवर मीनाई

हर मंज़र-ए-ख़ुश-रंग सुलग जाए तो क्या हो

अनवर मीनाई

जाने किस रंग से रूठेगी तबीअत उस की

अनवर मसूद

कब ज़िया-बार तिरा चेहरा-ए-ज़ेबा होगा

अनवर मसूद

बस अब तर्क-ए-तअल्लुक़ के बहुत पहलू निकलते हैं

अनवर मसूद

ग़ुस्सैला परिंदा एक दिन उसे खा जाएगा

अनवार फ़ितरत

मिरी नुमूद से पैदा है रंग-ए-नाकामी

अनवर देहलवी

देखा जो मर्ग तो मरना ज़ियाँ न था

अनवर देहलवी

ज़ख़्म-ए-नज़ारा ख़ून-ए-नज़र देखते रहो

अनवर मोअज़्ज़म

हमें भूला नहीं अफ़्साना दिल का

अनवर मोअज़्ज़म

फ़ज़ा-ए-दिल में घनी तीरगी सी लगती है

अनुभव गुप्ता

बस अंधेरे ने रंग बदला है

अंजुम सलीमी

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