सदा Poetry (page 27)

आरज़ू

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

यक-ब-यक शोरिश-ए-फ़ुग़ाँ की तरह

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

जैसे हम-बज़्म हैं फिर यार-ए-तरह-दार से हम

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

बे-दम हुए बीमार दवा क्यूँ नहीं देते

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

''आप की याद आती रही रात भर''

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मैं ग़ार में था और हवा के बग़ैर था

फ़ैसल अजमी

कोई मिलता नहीं ख़ुदा की तरह

फ़हमी बदायूनी

बर्ग-ए-सदा को लब से उड़े देर हो गई

फ़हीम शनास काज़मी

दिलों के बीच बदन की फ़सील उठा दी जाए

एज़ाज़ अफ़ज़ल

शहर-ए-बीना के लोग

एजाज़ रिज़वी

तेरे दामन की थी या मस्त हुआ किस की थी

एजाज़ उबैद

दुश्मनों के दरमियान सुल्ह

एजाज़ गुल

फूलों से होगी धूल जुदा देखते रहो

एजाज़ अासिफ़

डर डर के जिसे मैं सुन रहा हूँ

एहतिशाम हुसैन

साथ रखिए काम आएगा बहुत नाम-ए-ख़ुदा

एहतराम इस्लाम

मुंतशिर हर शय क़रीने से सजा दी जाएगी

एहतराम इस्लाम

तुम अच्छे मसीहा हो दवा क्यूँ नहीं देते

एहसान जाफ़री

यूँ उस पे मिरी अर्ज़-ए-तमन्ना का असर था

एहसान दानिश

न सियो होंट न ख़्वाबों में सदा दो हम को

एहसान दानिश

कल रात कुछ अजीब समाँ ग़म-कदे में था

एहसान दानिश

आज भड़की रग-ए-वहशत तिरे दीवानों की

एहसान दानिश

पूछता कौन वफ़ा से उस की

दिनेश नायडू

इलिएट्स-गर्ल्स-कॉलेज और कुल पाक ओ हिन्द मुशाएरा

दिलावर फ़िगार

कहाँ मैं अभी तक नज़र आ सका हूँ

दिल अय्यूबी

राहत कहाँ नसीब थी जो अब कहीं नहीं

दत्तात्रिया कैफ़ी

नई नई सूरतें बदन पर उजालता हूँ

दानियाल तरीर

कहानी एक रात की

दानिश फ़राज़ी

अभी आई भी नहीं कूचा-ए-दिलबर से सदा

दाग़ देहलवी

उन के इक जाँ-निसार हम भी हैं

दाग़ देहलवी

क़रीने से अजब आरास्ता क़ातिल की महफ़िल है

दाग़ देहलवी

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