सागर Poetry (page 29)

एक नज़्म

अज़रा अब्बास

नन्हा ग़ासिब

अज़मतुल्लाह ख़ाँ

हर एक रंग में यूँ डूब कर निखरते रहे

अज़ीज़ तमन्नाई

ग़रीब शहर

अज़ीज़ क़ैसी

एक मंज़र एक आलम

अज़ीज़ क़ैसी

दिल-ख़स्तगाँ में दर्द का आज़र कोई तो आए

अज़ीज़ क़ैसी

आह-ए-बे-असर निकली नाला ना-रसा निकला

अज़ीज़ क़ैसी

ये किस वहशत-ज़दा लम्हे में दाख़िल हो गए हैं

अज़ीज़ नबील

ख़याल-ओ-ख़्वाब का सारा धुआँ उतर चुका है

अज़ीज़ नबील

ख़ाक चेहरे पे मल रहा हूँ मैं

अज़ीज़ नबील

दश्त-ओ-सहरा में समुंदर में सफ़र है मेरा

अज़ीज़ नबील

मैं भी साहिल की तरह टूट के बह जाती हूँ

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

फूँक देंगे मिरे अंदर के उजाले मुझ को

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

न जाने कब से बराबर मिरी तलाश में है

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

मैं उस की बात के लहजे का ए'तिबार करूँ

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

लहू से उठ के घटाओं के दिल बरसते हैं

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

आप भी रेत का मल्बूस पहन कर देखें

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

दिल कुछ देर मचलता है फिर यादों में यूँ खो जाता है

अज़हर नक़वी

तुम बहर-ए-मोहब्बत के किनारे पे खड़े थे

अज़हर नैयर

ब-वक़्त-ए-शाम समुंदर में गिर गया सूरज

अज़हर नैयर

मैं महल रेत के सहरा में बनाने बैठा

अज़हर नैयर

हुरूफ़ ख़ाली सदफ़ और निसाब ज़ख़्मों के

अज़हर नैयर

हमारे चेहरे पे रंज-ओ-मलाल ऐसा था

अज़हर नैयर

हुई न ख़त्म तेरी रहगुज़ार क्या करते

अज़हर इक़बाल

मैं समुंदर था मुझे चैन से रहने न दिया

अज़हर इनायती

तस्बीह-ए-कुमरी सर्व-ए-सनोबर समेट लो

अज़हर हाश्मी

सब बातें ला-हासिल ठहरीं सारे ज़िक्र फ़ुज़ूल गए

अज़हर अली

दर-ओ-दीवार से डर लग रहा था

अज़हर अदीब

समेट लाता हूँ मोती तुम्हारी यादों के

आज़ाद गुलाटी

साहिल पे रुक के सू-ए-समुंदर न देखिए

आज़ाद गुलाटी

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