रात Poetry (page 11)

बारिश में अक्सर ऐसा हो जाता है

विकास शर्मा राज़

अज़ल से बंद दरवाज़ा खुला तो

विकास शर्मा राज़

फैला न यूँ ख़ुलूस की चादर मिरे लिए

वली मदनी

अँधेरी शब में चराग़-ए-रह-ए-वफ़ा देना

उषा भदोरिया

जो नहीं मुमकिन कभी मुमकिन वो होना चाहिए

उरूज ज़ेहरा ज़ैदी

किसे बताऊँ कि ग़म क्या है सरख़ुशी क्या है

उरूज ज़ैदी बदायूनी

बना के वहम ओ गुमाँ की दुनिया हक़ीक़तों के सराब देखूँ

उमैर मंज़र

देखा है कहीं रंग-ए-सहर वक़्त से पहले

तुर्फ़ा क़ुरैशी

आइने के रू-ब-रू इक आइना रखता हूँ मैं

तौसीफ ताबिश

दिन में सूरज है मिरी महरूमियों का तर्जुमाँ

तिश्ना बरेलवी

नूर-जहाँ का मज़ार

तिलोकचंद महरूम

ये किस से आज बरहम हो गई है

तिलोकचंद महरूम

शहर से एक तरफ़ दूर बहुत

तिलोकचंद महरूम

हिज्राँ की शब जो दर्द के मारे उदास हैं

तिलोकचंद महरूम

फ़ित्ना-आरा शोरिश-ए-उम्मीद है मेरे लिए

तिलोकचंद महरूम

हर इक के दुख पे जो अहल-ए-क़लम तड़पता था

तिफ़्ल दारा

वो अव्वलीं दर्द की गवाही सजी हुई बज़्म-ए-ख़्वाब जैसे

तौसीफ़ तबस्सुम

था पस-ए-मिज़्गान-तर इक हश्र बरपा और भी

तौसीफ़ तबस्सुम

क्या बताऊँ कि है किस ज़ुल्फ़ का सौदा मुझ को

तौसीफ़ तबस्सुम

काश इक शब के लिए ख़ुद को मयस्सर हो जाएँ

तौसीफ़ तबस्सुम

आइना मिलता तो शायद नज़र आते ख़ुद को

तौसीफ़ तबस्सुम

याद और ग़म की रिवायात से निकला हुआ है

तौक़ीर तक़ी

एक ख़्वाब

तौक़ीर अहमद

फूल मुरझा जाएँगे काँटे लगे रह जाएँगे

तसनीम आबिदी

ज़मीं पर सर-निगूँ बैठा हुआ हूँ

तस्लीम इलाही ज़ुल्फ़ी

मिल जाए अमाँ दुनिया में पल भर नहीं लगता

तस्लीम अहमद तसव्वुर

इतनी न कीजे जाने की जल्दी शब-ए-विसाल

मीर तस्कीन देहलवी

क्या क्या मज़े से रात की अहद-ए-शबाब में

मीर तस्कीन देहलवी

हुए थे भाग के पर्दे में तुम निहाँ क्यूँकर

मीर तस्कीन देहलवी

गर मेरे बैठने से वो आज़ार खींचते

मीर तस्कीन देहलवी

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