रात Poetry (page 13)

में न कहता था कि शहरों में न जा यार मिरे

ताहिर फ़राज़

अजीब हम हैं सबब के बग़ैर चाहते हैं

ताहिर फ़राज़

क्या शय है खींच लेती है शब को सर-ए-फ़लक

तफ़ज़ील अहमद

लहरों में भँवर निकलेंगे मेहवर न मिलेगा

तफ़ज़ील अहमद

ख़ामोश भी रह जाए और इज़हार भी कर दे

तफ़ज़ील अहमद

दश्त-ए-तन्हाई बादल हवा और मैं

ताबिश मेहदी

बे-घरी

ताबिश कमाल

'ताबिश' हवस-ए-लज़्ज़त-ए-आज़ार कहाँ तक

ताबिश देहलवी

वो साहिल-ए-शब पे सो गई थी

तबस्सुम काश्मीरी

मिलेगा दर्द तो दरमाँ की आरज़ू होगी

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

किसी के हाथ में जाम-ए-शराब आया है

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

साक़ी हो और चमन हो मीना हो और हम हों

ताबाँ अब्दुल हई

हुए हैं जा के आशिक़ अब तो हम उस शोख़ चंचल के

ताबाँ अब्दुल हई

मंज़िलों उस को आवाज़ देते रहे मंज़िलों जिस की कोई ख़बर भी न थी

ताब असलम

दिल के सहरा में बड़े ज़ोर का बादल बरसा

ताब असलम

हम किस को दिखाते शब-ए-फ़ुर्क़त की उदासी

तअशशुक़ लखनवी

चिराग़-दाग़ मैं दिन से जलाए बैठा हूँ

तअशशुक़ लखनवी

याद-ए-अय्याम कि हम-रुतबा-ए-रिज़वाँ हम थे

तअशशुक़ लखनवी

उन्स है ख़ाना-ए-सय्याद से गुलशन कैसा

तअशशुक़ लखनवी

न डरे बर्क़ से दिल की है कड़ी मेरी आँख

तअशशुक़ लखनवी

महफ़िल से उठाने के सज़ा-वार हमीं थे

तअशशुक़ लखनवी

कब अपनी ख़ुशी से वो आए हुए हैं

तअशशुक़ लखनवी

दो दमों से है फ़क़त गोर-ए-ग़रीबाँ आबाद

तअशशुक़ लखनवी

दिल जल के रह गए ज़क़न-ए-रश्क-ए-माह पर

तअशशुक़ लखनवी

बाग़ में फूलों को रौंद आई सवारी आप की

तअशशुक़ लखनवी

कभी कभी तिरी चाहत पे ये गुमाँ गुज़रा

सय्यदा शान-ए-मेराज

हिज्र में तेरे तसव्वुर का सहारा है बहुत

सय्यदा शान-ए-मेराज

कोई बतलाए माजरा क्या है

सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ

काश ऐसी भी कोई साअ'त हो

सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ

हर-सू ख़ुशबू को फ़ज़ाओं में बिखरता देखूँ

सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ

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