रात Poetry (page 22)

मंज़र यूँ था

शमीम क़ासमी

ये और बात कि गमले में उग रहा हूँ मैं

शमीम क़ासमी

शराब ओ शेर के साँचे में ढल के आई है

शमीम करहानी

क़ैद-ए-ग़म-ए-हयात से हम को छुड़ा लिया

शमीम करहानी

ख़मोश किस लिए बैठे हो चश्म-ए-तर क्यूँ हो

शमीम करहानी

हुजूम-ए-दर्द में ख़ंदाँ है कौन मेरे सिवा

शमीम करहानी

चमन लहक के रह गया घटा मचल के रह गई

शमीम करहानी

अगरचे इश्क़ में इक बे-ख़ुदी सी रहती है

शमीम करहानी

आ रही है शब-ए-ग़म मेरी तरफ़ मेरे लिए

शमीम करहानी

बहुत तवील शब-ए-ग़म है क्या किया जाए

शमीम जयपुरी

तिरे अहल-ए-दर्द के रोज़-ओ-शब इसी कश्मकश में गुज़र गए

शमीम जयपुरी

आज मेरी शब-ए-फ़ुर्क़त की सहर आई है

शमीम जयपुरी

शोला शोला थी हवा शीशा-ए-शब से पूछो

शमीम हनफ़ी

रोज़ ओ शब की गुत्थियाँ आँखों को सुलझाने न दे

शमीम हनफ़ी

लक़ड़हारे तुम्हारे खेल अब अच्छे नहीं लगते

शमीम हनफ़ी

अँधेरी शब है कहाँ रूठ कर वो जाएगा

शमीम फ़ारूक़ी

हर नफ़स दीदा-ए-दिल में तिरी यादों का हुजूम

शकूर जावेद

हम कि अफ़्कार को तज्सीम किया करते हैं

शाकिर कुंडान

ज़लज़ला

शकील बदायुनी

नुमाइश-ए-अलीगढ़

शकील बदायुनी

कहाँ है आ जा

शकील बदायुनी

तौफ़-ए-हरम न देर की गहराइयों में है

शकील बदायुनी

सर-निगूँ कर ही दिया शौक़-ए-जबीं-साई ने

शकील बदायुनी

नज़र-नवाज़ नज़ारों में जी नहीं लगता

शकील बदायुनी

इश्क़ का कोई ख़ैर-ख़्वाह तो है

शकील बदायुनी

बीत गया हंगाम-ए-क़यामत रोज़-ए-क़यामत आज भी है

शकील बदायुनी

बेकार गई आड़ तिरे पर्दा-ए-दर की

शकील बदायुनी

कच्चे रंगों का मौसम

शकील आज़मी

मुझ से मिलने शब-ए-ग़म और तो कौन आएगा

शकेब जलाली

मुजरिम

शकेब जलाली

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