रात Poetry (page 75)

फिर कोई ताज़ा-सितम वो सितम-ईजाद करे

असरा रिज़वी

बुझ गए मंज़र उफ़ुक़ पर हर निशाँ मद्धम हुआ

असलम महमूद

सोच की उलझी हुई झाड़ी की जानिब जो गई

असलम कोलसरी

जश्न हम यूँ भी मनाएँ देर तक

असलम हनीफ़

रौशनी हो रही है कुछ महसूस

असलम फ़र्रुख़ी

ये हिकायत तमाम को पहुँची

असलम फ़र्रुख़ी

नर्म आवाज़ों के बीच

असलम इमादी

अब रात आ रही है

असलम इमादी

वो शब-ए-ग़म जो कम अँधेरी थी

असलम इमादी

लिबास-ए-गुल में वो ख़ुशबू के ध्यान से निकला

असलम बदर

आँखों से मैं ने चख लिया मौसम के ज़हर को

असलम आज़ाद

वो रंग उड़े हैं कुछ अब के बरस बहारों के

असलम अंसारी

हर शख़्स इस हुजूम में तन्हा दिखाई दे

असलम अंसारी

इक बर्ग बर्ग दिन की ख़बर चाहिए मुझे

असलम अंसारी

अपनी सदा की गूँज ही तुझ को डरा न दे

असलम अंसारी

अब और चलने का इस दिल में हौसला ही न था

असलम अंसारी

नज़्म

आसिमा ताहिर

है मुस्तक़िल यही एहसास कुछ कमी सी है

आसिम वास्ती

तालिब हो वहाँ आन के क्या कोई सनम का

आसिफ़ुद्दौला

किस क़दर दर्द के शब करता था मज़कूर तिरा

आसिफ़ुद्दौला

जो शमशीर तेरी अलम देखते हैं

आसिफ़ुद्दौला

दिल दिया जी दिया ख़फ़ा न किया

आसिफ़ुद्दौला

जहान-ए-हुस्न-ओ-नज़र से किनारा करना है

अासिफ़ शफ़ी

मक़्सूद-अली-'दीवाना'

आसिफ़ रज़ा

दूर की शहज़ादी

आसिफ़ रज़ा

बसीत-ए-दश्त की हुर्मत को बाम-ओ-दर दे दे

अशरफ़ जावेद

अक्स भी कब शब-ए-हिज्राँ का तमाशाई है

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

जो ज़रूरी है कार कर पहले

अशोक साहनी

सफ़र

अशोक लाल

ये कश्ती-ए-हयात ये तूफ़ान-ए-हादसात

अश्क अमृतसरी

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